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Himachal Entry Tax और फास्टैग को लेकर मचे बवाल पर CM सुक्खू ने स्थिति साफ की, कहा बॉर्डर के 5KM दायरे में रहने वालों को मिलेगा ‘स्पेशल पास’,

Himachal Entry Tax Update: हिमाचल के सीमावर्ती इलाकों में एंट्री टैक्स और फास्टैग को लेकर मचे बवाल पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्थिति साफ की है। पंजाब-हरियाणा बॉर्डर के 5 किमी दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को पास की सुविधा मिलेगी।
Himachal Entry Tax Controversy Himachal Entry Tax और फास्टैग को लेकर मचे बवाल पर CM सुक्खू ने स्थिति साफ की, कहा बॉर्डर के 5KM दायरे में रहने वालों को मिलेगा 'स्पेशल पास',
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Himachal Entry Tax Controversy: हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी राज्यों, खासकर पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती इलाकों में एंट्री टैक्स और फास्टैग को लेकर चल रहा विरोध अब विधानसभा तक पहुँच गया है। विपक्ष ने जब इस मुद्दे पर चिंता जताई, तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में स्थिति साफ की। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि बॉर्डर के पास रहने वाले लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने फैसला लिया है कि पंजाब और हरियाणा की सीमा से सटे 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों को ‘पास’ की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, एंट्री टैक्स के नियमों को और भी सरल और तर्कसंगत बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने टैक्स बढ़ोतरी पर बात करते हुए कहा कि इसका जनता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि छोटी गाड़ियों के टैक्स में बहुत मामूली बढ़ोतरी हुई है, जबकि बड़े वाहनों के शुल्क में 130 से 170 रुपये तक का अंतर आया है। सीएम के मुताबिक, फास्टैग लागू होने से अब सारा लेनदेन पारदर्शी हो गया है, जिससे कुछ लोगों को लग सकता है कि पैसे ज्यादा कट रहे हैं, लेकिन असल में यह सिर्फ एक भ्रम है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों या छोटी गाड़ी चलाने वालों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है।

इससे पहले, सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी बहस हुई। विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि नई टैक्स व्यवस्था से आम लोगों को काफी दिक्कतें आ रही हैं और पंजाब के कई हिस्सों में इसके खिलाफ प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री को खुद पंजाब के सीएम और वित्त मंत्री से बात करके इस मामले को सुलझाना चाहिए ताकि बॉर्डर पर रहने वालों को बार-बार टैक्स न देना पड़े। वहीं, भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने फास्टैग प्रणाली और निजी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए भविष्य में और भी परेशानियां बढ़ने की आशंका जताई।

सरकार का तर्क है कि एंट्री टैक्स को फास्टैग से इसलिए जोड़ा गया है ताकि टोल बैरियरों पर गाड़ियों की लंबी लाइनें न लगें और भुगतान का तरीका डिजिटल और आसान हो सके। हालांकि, नई व्यवस्था और तकनीक के कारण लोगों के मन में जो डर और कंफ्यूजन है, उसे दूर करना अब सरकार के लिए एक चुनौती बन गया है।

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