Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रशासनिक और सरकारी सेवाओं के ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि आगामी 31 मार्च के बाद राज्य के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को सेवा विस्तार (Extension) नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब प्रदेश में एक्सटेंशन या पुनर्निर्धारण की व्यवस्था को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि जिन मामलों में पहले से ही सेवा विस्तार दिया जा चुका है, वे पुराने आदेशों के तहत अपनी निर्धारित अवधि तक ही मान्य रहेंगे। हालांकि, जनहित और आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में रियायत दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए डॉक्टरों की नई नियुक्तियां की जा सकती हैं ताकि मरीजों को किसी समस्या का सामना न करना पड़े।
भाजपा की आंतरिक कलह और पंचायत चुनाव
विपक्ष दल भाजपा पर कड़ा प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों को आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी वर्तमान में पांच अलग-अलग गुटों में विभाजित है और प्रदेश में अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। सुक्खू ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के भीतर ही एक-दूसरे को समाप्त करने का संघर्ष चल रहा है।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गति देते हुए घोषणा की कि हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मई से पहले संपन्न करा लिए जाएंगे। उपायुक्तों की शक्तियों पर कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के विषय पर उन्होंने कहा कि कैबिनेट जनहित में निर्णय लेती है और कोर्ट अपनी प्रक्रिया का पालन करता है, लेकिन भाजपा इसे व्यर्थ का राजनीतिक मुद्दा बना रही है।
हिमकेयर योजना में गड़बड़ी और सुधार का संकल्प
वहीं पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान ‘हिमकेयर’ योजना में हुए कथित भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना में लगभग 110 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। अनियमितताओं का स्तर इतना अधिक था कि पुरुषों के नाम पर गर्भाशय (यूटेरस) के ऑपरेशन के बिल जारी कर दिए गए।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि इन भ्रष्टाचारों की जांच कर तथ्यों को जनता के समक्ष लाया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार हिमकेयर योजना को बंद करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि इसमें व्यापक सुधार कर इसे और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जाएगा ताकि वास्तविक लाभार्थियों को इसका लाभ मिल सके।


















