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MSP on Fish: सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, हिमाचल में अब जलाशय की मछलियों पर भी मिलेगी MSP

Himachal Machuara Kalyan Yojana: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के इतिहास में पहली बार मछुआरों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने और रॉयल्टी को घटाकर 1 प्रतिशत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
MSP on Fish: सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, अब जलाशय की मछलियों पर भी मिलेगी MSP

MSP on Fish: हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने मछुआरा समुदाय के उत्थान के लिए सक्रिय और केंद्रित कदम उठाए हैं। राज्य सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने और मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के बजट 2026-27 की घोषणाओं के अनुरूप, मत्स्य विभाग इन पहलों को जमीनी स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रहा है।

बाजार के उतार-चढ़ाव से जलाशय मछुआरों की सुरक्षा, उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाए गए हैं। यह प्रयास सरकार की मछुआरों के कल्याण और मत्स्य क्षेत्र के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार जलाशयों से प्राप्त मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (msp on fish) की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य मछुआरों को कीमतों में अनिश्चितता से बचाना और उन्हें सुनिश्चित आय प्रदान करना है। जलाशय मछलियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, यदि नीलामी मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम होता है, तो राज्य सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रति किलोग्राम अधिकतम 20 रुपये तक की सब्सिडी प्रदान करेगी। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और सब्सिडी सीधे पात्र मछुआरों के बैंक खातों में जमा होगी।
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ख्यमंत्री ने मछुआरों को एक बड़ी राहत के रूप में, जलाशयों से प्राप्त मछलियों पर रॉयल्टी दर में उल्लेखनीय कमी की घोषणा की है। प्रदेश सरकार पहले ही रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर चुकी थी, और अब इसे वर्तमान वित्त वर्ष में घटाकर मात्र 1 प्रतिशत कर दिया गया है। इस निर्णय से 6,000 से अधिक जलाशय मछुआरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा और उनका आर्थिक बोझ कम होगा।

हिमाचल प्रदेश में पांच प्रमुख जलाशय हैं-गोबिंद सागर (बिलासपुर और ऊना), पोंग डैम (कांगड़ा), रंजीत सागर और चमेरा (चंबा), तथा कोल डैम (बिलासपुर)। गोबिंद सागर, कोल डैम, रंजीत सागर और चमेरा जलाशयों में सिल्वर कार्प प्रमुख प्रजाति है, जबकि पोंग डैम में सिंधारा प्रमुख है। अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प शामिल हैं। उन्नत फिंगरलिंग्स (70-100 मिमी) के वार्षिक स्टॉकिंग जैसे लक्षित प्रयासों के कारण जलाशय मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलाशयों से वर्ष 2022-23 का उत्पादन 549.35 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 818.02 मीट्रिक टन हो गया है, जो इस क्षेत्र में मजबूत प्रगति को दर्शाता है।

इन प्रगतिशील नीतिगत उपायों से जलाशय मत्स्य अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, सतत मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा और मछुआरा समुदाय की भागीदारी में वृद्धि होगी। सरकार मत्स्य अवसंरचना के विस्तार, विपणन व्यवस्था में सुधार और मछुआरों व मत्स्य पालकों के लिए बेहतर आजीविका अवसर सृजित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

प्रदेश सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप राज्य में कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मच्छली उत्पादन वर्ष 2024-25 के 19,019 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 20,005 मीट्रिक टन हो गया है। यह वृद्धि मत्स्य क्षेत्र में चल रही विकासात्मक पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है और ग्रामीण रोजगार व राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

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