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University Amendment Bill 2026: हिमाचल के विश्वविद्यालयों में पारदर्शी होंगी भर्तियां, संशोधन विधेयक विधानसभा में पारित

HP University Recruitment Bill 2026: हिमाचल प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और वित्तीय अनुशासन बनाने के लिए विधानसभा में विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 पास हो गया है। भाजपा के विरोध के बावजूद यह बिल ध्वनिमत से पारित हुआ।
University Amendment Bill 2026: हिमाचल के विश्वविद्यालयों में पारदर्शी होंगी भर्तियां, संशोधन विधेयक विधानसभा में पारित

Himachal State University Amendment Bill 2026: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को “हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026” ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को सदन के पटल पर प्रस्तुत किया था। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल के भारी विरोध और हंगामे के बीच सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी।

बता दें कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को अधिक पारदर्शी बनाने और वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2026 लाया है। नए प्रावधान लागू होने के बाद प्रदेश के छह सरकारी विश्वविद्यालयों में अब शिक्षकों और गैर-शिक्षण पदों की भर्तियां पारदर्शी तरीके से होंगी।

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इस संशोधन कानून के लागू होने के साथ ही प्रदेश के सभी छह सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की सीधी भर्ती का अधिकार हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) को सौंप दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, गैर-शिक्षण (नॉन-टीचिंग) पदों पर होने वाली सभी सीधी भर्तियां अब हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (HPRCA) या राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित किसी अन्य भर्ती एजेंसी के माध्यम से संपन्न की जाएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा तय किए गए मानकों के अनुरूप ही संचालित की जाएगी।

विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस ऐतिहासिक कदम से विश्वविद्यालयों में दी जाने वाली सरकारी नौकरियों में पूर्ण पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से किसी भी प्रकार की धांधली या गड़बड़ी की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल की ओर इशारा करते हुए आरोप लगाया कि पिछले शासनकाल के दौरान हुई विश्वविद्यालय भर्तियों में गंभीर अनियमितताएं और धांधली देखने को मिली थीं, जिन्हें रोकने के लिए यह कड़ा कानून लाना अत्यंत आवश्यक हो गया था।

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भर्तियों के अतिरिक्त, विश्वविद्यालयों के बजटीय और वित्तीय खर्चों में भी पारदर्शिता और कड़ा अनुशासन लाने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान जोड़े गए हैं। कानून के तहत अब सभी छह विश्वविद्यालयों की ‘वित्त समिति’ (Finance Committee) का नेतृत्व प्रदेश सरकार के वित्त सचिव करेंगे। वित्त सचिव की अध्यक्षता में यह समिति वित्तीय प्रस्तावों, नए पदों के सृजन और प्रशासनिक खर्चों पर कड़ी निगरानी रखेगी। इससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रुकेगा और शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय जवाबदेही तय हो सकेगी।

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