Solan News: हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए अलग से एससी/एसटी विकास निधि कानून (SC/ST Development Fund Act) बनाने की मांग तेज हो गई है। राज्य गठबंधन हिमाचल की कसौली विधानसभा इकाई और जिला इकाई सोलन ने रविवार को एसडीएम कसौली के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर इस संबंध में शीघ्र कानून बनाने की मांग उठाई।
गठबंधन ने मांग की है कि प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात के अनुसार बजट का प्रावधान किया जाए और इस राशि के उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित कानून बनाया जाए।

ज्ञापन में मांग की गई है कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून लागू किया जाए। इसके तहत एससी/एसटी समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए निर्धारित बजट राशि का पारदर्शी एवं जवाबदेह उपयोग सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
भूमिहीन परिवारों को भूमि देने की भी मांग
प्रतिनिधिमंडल ने भूमिहीन परिवारों को आवासीय और कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई। प्रतिनिधियों का कहना है कि वंचित समाज लंबे समय से इस मांग को उठा रहा है। गठबंधन की प्रतिनिधि एवं ह्यूमन राइट चेयरपर्सन वंदना आनंद ने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति घटक योजना और जनजाति उप-योजना शुरू होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में इन प्रावधानों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में एससी/एसटी विकास के लिए बजटीय आवंटन करीब 5 प्रतिशत तक सीमित रहा है, जबकि जनसंख्या अनुपात के अनुसार अधिक बजट आवंटन की आवश्यकता है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि आवंटित राशि का भी पूरी तरह मूल उद्देश्यों के लिए उपयोग नहीं हो पा रहा है।
सरकार के चुनावी वादे का दिलाया स्मरण
गठबंधन ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र और अन्य मंचों पर इस कानून को बनाने का वादा किया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पूजा जयसवाल ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान गठबंधन ने मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर बैठकें की हैं। उन्होंने बताया कि 17 में से 15 विधायकों ने इस मांग को समर्थन दिया है। गठबंधन के अनुसार, 11 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय को इस संबंध में एक ड्राफ्ट बिल भी सौंपा गया था।
मानसून सत्र में प्रक्रिया शुरू करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि सरकार अपने ‘न्याय संकल्प’ और चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों के अनुरूप आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस कानून को बनाने की प्रक्रिया शुरू करे। पूजा जयसवाल ने कहा कि इस कानून के बनने से हिमाचल प्रदेश में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।
कार्यक्रम में कसौली विधानसभा इकाई से वंदना आनंद, पूजा जयसवाल, अनीता, मनीषा जडेजा, जगभूषण आनंद, अमृता वरदान, पलक और सुषमा सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतिनिधियों ने संकल्प लिया कि जब तक एससी/एसटी विकास निधि कानून नहीं बनता, तब तक वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।


















