Mahila Aarakshan Bill 2029: संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के कार्यान्वयन और परिसीमन का मुद्दा केंद्र में रहेगा। इस महत्वपूर्ण सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों के संसदीय नेताओं को पत्र लिखकर महिला आरक्षण अधिनियम में आवश्यक संशोधनों पर सहयोग और समर्थन मांगा है।
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में इस संवैधानिक संशोधन को देश की महिलाओं के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया है। बता दें कि सितंबर 2023 में पारित यह कानून लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करता है। हालांकि, मौजूदा प्रावधानों के अनुसार इसे 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू किया जा सकता था, जिसका अर्थ था कि यह 2034 से पहले प्रभावी नहीं हो पाता।

2029 के चुनावों पर सरकार की नजर
केंद्र सरकार अब इस अधिनियम में बदलाव कर इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करना चाहती है। पीएम मोदी ने पत्र में लिखा, “यह विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने और सबको साथ लेकर चलने की हमारी प्रतिबद्धता का अवसर है। विकसित राष्ट्र के सपने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।” उन्होंने जोर दिया कि अब समय आ गया है जब इस कानून को इसकी वास्तविक भावना के साथ लागू किया जाए।
संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने हेतु भाजपा को विपक्षी दलों के समर्थन की सख्त जरूरत होगी। प्रधानमंत्री ने इसे किसी दल या व्यक्ति से ऊपर बताते हुए भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी करार दिया है।
विपक्ष ने उठाए तैयारी और प्रक्रिया पर सवाल
प्रधानमंत्री की इस अपील पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। खड़गे ने कहा कि अधिनियम पारित हुए 30 महीने बीत चुके हैं और यह विशेष सत्र विपक्ष को विश्वास में लिए बिना बुलाया गया है। उन्होंने सरकार पर परिसीमन के विवरण साझा न करने का आरोप लगाया और कहा कि बिना जानकारी के सार्थक चर्चा संभव नहीं है।
खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए जल्दबाजी कर रही है। विपक्षी दल 29 अप्रैल को चुनाव समाप्त होने के बाद परिसीमन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक की मांग कर रहे हैं।
सरकार और क्षेत्रीय दलों के बीच टकराव
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष की आपत्तियों पर असहमति जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं से जुड़े वादे ‘स्थगन की राजनीति’ का हिस्सा नहीं हो सकते। रिजिजू ने कहा कि परिसीमन से जुड़े संशोधन यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि नारी शक्ति को 2029 से पहले उनका हक मिले।
दूसरी ओर, सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने सीटों की संख्या में प्रस्तावित बढ़ोतरी पर संघीय ढांचे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने तर्क दिया कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को दक्षिणी राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक सीटें मिलेंगी, जो क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ सकता है। साथ ही, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के चलते सत्र को स्थगित करने की मांग भी की गई है।
आगामी 15 अप्रैल को दिल्ली में ‘INDIA’ गठबंधन के नेताओं की बैठक होनी है, जिसमें इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाई जाएगी। फिलहाल, 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह विशेष सत्र भारतीय संसदीय इतिहास के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।


















