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Himachal Politics: शिमला में गरजे बीजेपी नेता, कांग्रेस और गठबंधन दलों को बताया महिला विरोधी

BJP Mahila Morcha Protest Shimla: शिमला में आयोजित 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' के दौरान भाजपा महिला मोर्चा ने कांग्रेस और गठबंधन दलों पर तीखा हमला बोला। प्रदर्शन में हजारों महिलाओं की भागीदारी ने राज्य की राजनीति में नया उबाल ला दिया है।
Published on: 23 April 2026
Himachal Politics: शिमला में गरजे बीजेपी नेता, कांग्रेस और गठबंधन दलों को बताया महिला विरोधी

Himachal Politics News: शिमला में सोमवार को भाजपा महिला मोर्चा ने एक भव्य ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का आयोजन किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ मतदान करने वाले विपक्षी दलों के रुख का कड़ा विरोध करना था। भाजपा ने इस  दौरान कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के खिलाफ जामकर नारेबाजी भी की।

इस दौरान भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डेजी ठाकुर ने उस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ‘काला अध्याय’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने संवैधानिक संशोधन विधेयक को हराकर महिलाओं के सशक्तिकरण को रोकने का प्रयास किया है।

डेजी ठाकुर ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल महिलाओं को केवल एक ‘वोट बैंक’ के रूप में देखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान पर प्रहार है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के इस रवैये के खिलाफ महिलाओं में गहरा आक्रोश है, जो अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है।

इस पदयात्रा में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने प्रदर्शन को और अधिक आक्रामक बना दिया। रैली का नेतृत्व डेजी ठाकुर ने किया, जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा, सह-प्रभारी संजय टंडन और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर मुख्य रूप से शामिल हुए। हजारों की संख्या में पहुंची महिलाओं ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया और सरकार की महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश महामंत्री पायल वैद्य ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून का लक्ष्य पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना था। पायल वैद्य ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया था, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस अवसर को बाधित किया।

इस दौरान प्रशासनिक बाधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विधायक रीना कश्यप ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोलन और आसपास के क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं की बसों को जानबूझकर रोका गया और उनके मार्ग को डायवर्ट करने की कोशिश की गई। रीना कश्यप ने इसे महिला आवाज को दबाने का एक सुनियोजित प्रयास बताया, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा कि रैली में उमड़ी भीड़ ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के ऐसे हथकंडे पूरी तरह विफल रहे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कांग्रेस को महिलाओं का विश्वासघाती करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक स्तर पर सशक्तिकरण हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि शासन व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना अब समय की मांग और एक तार्किक कदम था, जिसे विपक्ष ने रोकने का काम किया है।

अंत में, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस रैली को एक बड़े राजनीतिक बदलाव की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का महिला-विरोधी चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले चुनाव में राज्य की महिलाएं अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करते हुए विपक्ष को उचित जवाब देंगी। उन्होंने अंत में यह भी जोड़ा कि महिलाएं अब निष्क्रिय भागीदार नहीं रही हैं, बल्कि वे राजनीतिक बदलाव की मुख्य शक्ति बन चुकी हैं।

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