Shimla News Today: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले तत्वों के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। एक स्थानीय दर्जी और उसके सहकर्मी के साथ बर्बरता से मारपीट करने और सड़क पर उनका जुलूस निकालने के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस घटना में शामिल हिंदू संघर्ष समिति के दो प्रमुख नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 43 वर्षीय मदन ठाकुर (निवासी देवघोडी) और 47 वर्षीय विजय शर्मा (निवासी कुमार भवन, संजौली) के रूप में हुई है।
जानकारी के मुताबिक यह पूरी घटना बीते 6 जून को संजौली इलाके में घटित हुई थी। संजौली थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पीड़ित अजीम मिर्जा इलाके में एक दर्जी की दुकान चलाता है, जहां आफताब नाम का एक अन्य युवक भी उसके साथ काम करता है। अजीम मिर्जा ने पुलिस को बताया कि 6 जून को कुछ लोग अचानक उनकी दुकान के भीतर घुस आए। उस उग्र भीड़ के साथ एक युवती भी मौजूद थी, जिसे आगे कर लोग अजीम और आफताब की शिनाख्त करने का लगातार दबाव बना रहे थे।
शिकायत के मुताबिक, जब पीड़ित युवती ने दुकान में मौजूद अजीम मिर्जा और आफताब को पहचानने से साफ तौर पर इन्कार कर दिया, तब भी वहां मौजूद भीड़ शांत नहीं हुई। कानून को हाथ में लेते हुए उपद्रवियों ने सबसे पहले दुकान के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की तारों को पूरी तरह से तोड़ दिया ताकि घटना का कोई साक्ष्य न बचे। इसके बाद उन्होंने जबरन मोबाइल फोन से वीडियो बनाने का प्रयास किया और अजीम तथा आफताब को घसीटते हुए दुकान से बाहर सड़क पर निकाल लिया।
सड़क पर लाने के बाद भीड़ ने दोनों युवकों के साथ बेदर्दी से मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोपियों ने दोनों पीड़ितों का सरेआम सड़क पर जुलूस निकाला और इस दौरान लगातार नारेबाजी भी की गई। शिमला पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह गंभीर बात सामने आई है कि आरोपियों ने कानून को पूरी तरह से ताक पर रखकर खुद ही ‘मॉब जस्टिस’ यानी मौके पर न्याय करने का प्रयास किया। आरोपियों ने न सिर्फ पूरी तरह निर्दोष व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि पुलिस की आधिकारिक जांच प्रक्रिया को भी बाधित करने का प्रयास किया। इसी आधार पर पुलिस ने मदन ठाकुर और विजय शर्मा को हिरासत में लिया है।
पुलिस जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस पूरी घटना के तार शिमला के एक अन्य मामले से जुड़े हुए हैं। पुलिस प्रशासन के अनुसार, जिस युवती को भीड़ जबरन दर्जी की दुकान पर लेकर आई थी, उसने पहले ही शिमला के महिला थाने में उबैद नामक एक अन्य युवक के खिलाफ छेड़छाड़ की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। महिला पुलिस ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी उबैद के खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीड़ित युवती ने अपनी मूल शिकायत में दर्जी अजीम मिर्जा या आफताब पर किसी भी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया था। पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर इस मामले की अलग से निष्पक्ष जांच कर रहा था, लेकिन इसके बावजूद भीड़ ने बिना किसी तथ्य या जानकारी के दोनों निर्दोषों को निशाना बनाया और उनके साथ मारपीट की।
मामले की पुष्टि करते हुए शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि पुलिस इस घटनाक्रम को लेकर बेहद गंभीर है। शिमला पुलिस ने इस कार्रवाई के जरिए कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि दोनों ही मामलों (छेड़छाड़ और मारपीट) की जांच पूरी तरह से साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर कानून के दायरे में रहकर की जा रही है। किसी भी व्यक्ति, समूह या सामाजिक संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए हिंदू संघर्ष समिति के दोनों नेताओं से मामले में आगे की कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि घटना में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जा सके।

















