Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

AAP Rajya Sabha Split: क्या अरविंद केजरीवाल की आखिरी कोशिशें हुईं नाकाम? जानें पूरा सच

AAP Split: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के घटनाक्रम ने राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा आखिरी समय में की गई तमाम कोशिशें भी सांसदों को रोकने में विफल रहीं।
Published on: 27 April 2026
AAP Rajya Sabha Split: क्या अरविंद केजरीवाल की आखिरी कोशिशें हुईं नाकाम? जानें पूरा सच

AAP Rajya Sabha Split: आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसदों का एक बड़ा धड़ा पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गया है। इस राजनीतिक उलटफेर के बीच सामने आया है कि पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को अंत तक इस बगावत का अंदाजा नहीं था। सूत्रों के अनुसार, स्थिति को संभालने के लिए केजरीवाल ने अंतिम क्षणों में पार्टी के अधिकांश सांसदों से संपर्क साधा था, लेकिन यह कोशिशें काफी देर से शुरू की गईं, जिसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

इस घटनाक्रम में सबसे बड़ा चौंकाने वाला नाम संदीप पाठक का रहा। अरविंद केजरीवाल उन्हें अपना बेहद करीबी और वफादार मानते थे, इसलिए उनके पाले बदलने की खबर ने पार्टी नेतृत्व को स्तब्ध कर दिया। जानकारों का कहना है कि केजरीवाल को भरोसा था कि पाठक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे, लेकिन उनका भी भाजपा के साथ जाना पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP सांसद संजय सिंह ने रविवार को कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को एक औपचारिक याचिका सौंपकर भाजपा में शामिल हुए सात सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। संजय सिंह ने दावा किया कि यह विलय दल-बदल विरोधी कानून का खुला उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ, तो पार्टी इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।

संजय सिंह ने तर्क दिया कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि इस तरह के विलय की स्थिति में सदस्यता क्यों रद्द होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी कानून सम्मत तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया  में छप्पी एक खबर के मुताबिक घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि बगावत की पटकथा काफी समय से लिखी जा रही थी। केजरीवाल ने 22 अप्रैल से ही सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बात करना और मुलाकातें करना शुरू कर दिया था। सूत्रों की मानें तो उन्होंने विक्रमजीत सिंह साहनी, अशोक मित्तल और संदीप पाठक से फोन पर बातचीत की और बैठकें भी कीं। यहां तक कि हरभजन सिंह, जो उस समय मुंबई में थे, उनसे भी केजरीवाल की बातचीत हुई थी।

मुलाकातों के दौरान केजरीवाल ने सांसदों से यह जानने की कोशिश की कि क्या उन पर किसी तरह का दबाव है या उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए फोन आ रहे हैं। 22 अप्रैल को जब विक्रमजीत सिंह साहनी ने केजरीवाल से मुलाकात की, तो उनसे भी यही सवाल पूछा गया था। वहीं, संदीप पाठक के साथ केजरीवाल की डेढ़ घंटे लंबी बैठक हुई थी, जिसके बाद वे आश्वस्त थे कि पाठक पार्टी नहीं छोड़ेंगे।

अंतिम समय में भी केजरीवाल ने शुक्रवार को साहनी से बात की और शाम को उन्हें मिलने के लिए बुलाया। हालांकि, उसी दिन दोपहर में राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की औपचारिक घोषणा कर दी। केजरीवाल के प्रयासों का विफल होना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर असंतोष काफी लंबे समय से पनप रहा था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राघव चड्ढा के अलावा संदीप पाठक भी काफी समय से नाराज चल रहे थे। ये दोनों नेता पंजाब में पार्टी की जीत के सूत्रधार माने जाते थे, लेकिन दिल्ली के चुनाव में हार के बाद से संदीप पाठक का पार्टी में प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया। दूसरी ओर, विक्रमजीत सिंह साहनी ने स्वीकार किया कि राज्य सरकार के कामकाज के तरीकों और पंजाब में चल रहे संकट को लेकर उनका मोहभंग हो चुका था, जो उनके इस निर्णय का एक प्रमुख कारण बना।

AAParvind kejriwalBJPIndian PoliticsRaghav ChadhaRajya Sabha

Join WhatsApp

Join Now