Himachal News Today: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के राजनीतिक नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों के वेतन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, राज्य के उपमुख्यमंत्री, सभी कैबिनेट मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधायकों के वेतन स्थगन को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
बता दें कि सुक्खू सरकार में लिया गया यह नया फैसला 18 अप्रैल 2026 को जारी की गई पिछली अधिसूचना में आंशिक संशोधन के रूप में सामने आया है। इस नए आदेश के बाद अब उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधानसभा के सभी सदस्यों को उनका लंबित वेतन प्राप्त हो सकेगा। सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जो वेतन राशि स्थगित की गई थी, उसका भुगतान जून महीने के वेतन के साथ आगामी जुलाई में कर दिया जाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को भी अब उनका पूरा वेतन नियमानुसार मिलेगा। पिछली अधिसूचना के तहत इन सभी के वेतन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था, जिससे अब इन्हें राहत मिल गई है। हालांकि, सरकार के इस फैसले में मुख्यमंत्री को लेकर एक महत्वपूर्ण अपवाद रखा गया है। नए आदेशों के बावजूद मुख्यमंत्री के वेतन पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री का 50 फीसदी वेतन स्थगन अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। मुख्यमंत्री के वेतन को लेकर यह व्यवस्था 18 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के प्रावधानों के तहत ही काम करेगी। राज्य सरकार ने इस दोहरे निर्णय के संबंध में एक स्पष्टीकरण भी जारी किया है, जिसे राज्य के वित्तीय प्रबंधन की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
गौरतलब है कि मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन को स्थगित करने का यह कड़ा निर्णय मुख्यमंत्री की बजट घोषणा का हिस्सा था। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के आर्थिक हालात को पटरी पर लाने और वित्तीय संकट से उबरने के लिए मंत्रियों-विधायकों समेत प्रशासनिक अधिकारियों की विभिन्न श्रेणियों के वेतन को स्थगित करने का फैसला लिया था। इस वित्तीय व्यवस्था को चालू वर्ष में 1 अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू किया गया था।
मूल योजना के तहत मुख्यमंत्री का 50 फीसदी, विधानसभा अध्यक्ष और सभी मंत्रियों का 30 फीसदी तथा विधायकों का 20 फीसदी वेतन छह महीने के लिए स्थगित किया जाना था। इसके साथ ही, नौकरशाही पर भी इसका असर पड़ा था, जिसमें मुख्य सचिव से लेकर सचिव स्तर के अफसरों का 30 फीसदी और उससे नीचे की श्रेणियों के कर्मचारियों का 20 से लेकर 3 फीसदी तक वेतन छह महीने के लिए रोकने का फैसला हुआ था।
हालांकि, इस कड़े आर्थिक निर्णय की समीक्षा सरकार द्वारा समय-समय पर की जाती रही है। इसी कड़ी में, क्लास ए और क्लास बी के अधिकारियों के वेतन में कटौती करने के फैसले को सरकार ने पहले ही 15 अप्रैल को वापस ले लिया था।
इसके बाद, हाल ही में बीते रविवार को वित्त विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्य सचिव (CS), अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और जिला उपायुक्तों (DC) का छह महीने के लिए स्थगित किया गया वेतन महज तीन महीने के भीतर ही वापस बहाल करने का निर्णय लिया था, और अब राजनेताओं के वेतन बहाली का भी आदेश आ गया है।
















