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Gig Workers Social Security: अब 90 दिन काम करना हुआ अनिवार्य, वरना नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

Gig Workers Social Security New Rules: केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत नए नियम जारी किए हैं, जिसमें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा के लिए न्यूनतम कार्य दिवस की सख्त शर्त रखी गई है।
Published on: 12 May 2026
Gig Workers Social Security: अब 90 दिन काम करना हुआ अनिवार्य, वरना नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

Gig Workers Social Security: केंद्र सरकार ने देश की तेजी से बढ़ती गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों युवाओं और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी से जुड़े नए नियमों की घोषणा कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब Swiggy, Zomato, Uber, Ola और Rapido जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य सरकारी सुरक्षा लाभ लेने के लिए साल में कम से कम तय दिनों तक काम करना अनिवार्य होगा। इन नए नियमों का सीधा उद्देश्य गिग वर्कर्स को एक औपचारिक पहचान देना और उनकी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

गिग वर्करों के लिए 90 से 120 दिन की कार्य अवधि हुई अनिवार्य
सरकार की ओर से जारी सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत जारी अंतिम नियमों के अनुसार, यदि कोई गिग वर्कर किसी एक एग्रीगेटर (कंपनी) के साथ काम कर रहा है, तो उसे लाभ का पात्र बनने के लिए साल में कम से कम 90 दिन कार्य करना होगा। वहीं, जो कर्मचारी अपनी आय बढ़ाने के लिए एक साथ कई प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन निर्धारित की गई है। सरकार का मानना है कि इस समय सीमा के निर्धारण से उन नियमित कर्मचारियों की पहचान हो सकेगी जो वास्तव में इस क्षेत्र पर आजीविका के लिए निर्भर हैं।

काम के दिनों की गणना को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। यदि कोई कर्मचारी एक दिन में किसी एक प्लेटफॉर्म के माध्यम से कमाई करता है, तो उसे ‘एक कार्य दिवस’ माना जाएगा। हालांकि, बहु-प्लेटफॉर्म (मल्टीपल प्लेटफॉर्म) पर काम करने वालों के लिए एक बड़ी राहत है; यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करता है, तो उसके खाते में तीन दिन की एंगेजमेंट जोड़ी जाएगी। इस व्यवस्था से कई ऐप्स पर काम करने वाले वर्कर तेजी से अपनी पात्रता सीमा को पूरा कर सकेंगे।

कंपनियों की जवाबदेही और डेटा प्रबंधन
उल्लेखनीय है कि नए प्रावधानों के तहत अब एग्रीगेटर कंपनियों पर भारी जिम्मेदारी डाली गई है। कंपनियों को अपने हर गिग वर्कर का विस्तृत रिकॉर्ड सरकारी पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। यह जानकारी 45 दिनों के भीतर साझा करनी होगी। इसके अतिरिक्त, कंपनियों को अब रियल-टाइम आधार पर नए कर्मचारियों के जुड़ने और पुराने कर्मचारियों के काम छोड़ने का डेटा अपडेट करना होगा। इस पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकार हर पात्र वर्कर को एक विशिष्ट पहचान पत्र जारी करेगी, जिससे उन तक लाभ पहुंचाना सुगम होगा।

देरी पर लगेगा 12 फीसदी तक वार्षिक ब्याज
गौरतलब है कि सरकार ने कंपनियों द्वारा सोशल सिक्योरिटी फंड में किए जाने वाले योगदान को लेकर भी सख्ती दिखाई है। यदि कोई एग्रीगेटर कंपनी तय समय सीमा के भीतर निर्धारित फंड जमा नहीं करती है, तो उसे जुर्माने के तौर पर ब्याज का भुगतान करना होगा। नियमों के मुताबिक, देरी की स्थिति में कंपनियों को हर महीने 1 फीसदी का ब्याज देना होगा, जो वार्षिक आधार पर 12 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। यह कड़ा प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि कंपनियां वर्कर्स के हितों की अनदेखी न करें और समय पर भुगतान करें।

पात्रता की शर्तें और उम्र की सीमा
बता दें कि सामाजिक सुरक्षा का यह सुरक्षा कवच कुछ विशिष्ट शर्तों के साथ आएगा। नियमों के अनुसार, 60 साल से अधिक उम्र के गिग वर्कर्स इन योजनाओं के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगे। साथ ही, यदि किसी कर्मचारी ने पिछले वित्त वर्ष में 90 दिन (एकल प्लेटफॉर्म) या 120 दिन (मल्टीपल प्लेटफॉर्म) की शर्त पूरी नहीं की है, तो उसे मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसे लाभ बंद किए जा सकते हैं।

इन केंद्रीय नियमों के जारी होने के बाद अब राज्य सरकारों के पास भी अपने स्थानीय नियम तैयार करने का अधिकार आ गया है। राज्य सरकारें केंद्र के इन दिशा-निर्देशों को आधार बनाकर अपने प्रदेश के गिग वर्कर्स के लिए नई व्यवस्थाएं लागू कर सकती हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस कदम से देशभर में फैले असंगठित क्षेत्र के इन डिजिटल कामगारों को न केवल वित्तीय सुरक्षा मिलेगी, बल्कि समाज में एक सुरक्षित कार्य वातावरण भी प्राप्त होगा।

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