NTPC Share Price News: देश की सबसे बड़ी सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी (NTPC) ने कचरे से ऊर्जा बनाने के क्षेत्र में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के साथ अपने जॉइंट वेंचर में मौजूद 26 फीसदी हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया है। इस सौदे के साथ ही ‘NTPC EDMC वेस्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ अब पूरी तरह से एनटीपीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (Wholly Owned Subsidiary) बन गई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस पूर्ण अधिग्रहण के बाद दिल्ली में कचरे से बिजली बनाने के कारोबार पर एनटीपीसी का एकाधिकार हो गया है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को दी गई आधिकारिक जानकारी में स्पष्ट किया है कि उसने एमसीडी के साथ 11 जून 2019 को हुए जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है। अब इस इकाई के संचालन और भविष्य के विस्तार के लिए किसी भी तीसरे पक्ष की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।
एक्पर्ट के मुताबिक शेयर बाजार में इस खबर का असर गुरुवार को ही दिखने लगा था, जब एनटीपीसी के शेयरों में लगभग 2 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। हालांकि, बाजार बंद होने तक शेयर 400 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर पर स्थिर रहा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि शुक्रवार को ट्रेडिंग सत्र शुरू होते ही कंपनी के शेयरों में निवेशकों की भारी सक्रियता और वॉल्यूम में उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह डील कंपनी के ‘वेस्ट-टू-एनर्जी’ पोर्टफोलियो के लिए बेहद सकारात्मक मानी जा रही है।
बाजार विश्लेषकों इस सौदे के वित्तीय पहलुओं की बात करें तो एनटीपीसी ने नगर निगम के पास मौजूद 52,000 इक्विटी शेयरों को उनकी फेस वैल्यू पर ही खरीदा है। कुल 5.20 लाख रुपये की इस नकद राशि के भुगतान के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण पूरा हो गया है। इस अधिग्रहण प्रक्रिया को एनटीपीसी बोर्ड और एमसीडी के हाउस ऑफ कॉरपोरेशन, दोनों महत्वपूर्ण संस्थाओं ने अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है।
उल्लेखनीय है कि ‘NTPC EDMC वेस्ट सॉल्यूशंस’ की स्थापना 1 जून 2020 को की गई थी। इस कंपनी का मुख्य दायित्व राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कचरा प्रबंधन की गंभीर समस्या का समाधान करना और उस कचरे का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना है। दिल्ली जैसे महानगर में लैंडफिल साइट्स पर बढ़ते दबाव को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में यह उपक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अब पूर्ण नियंत्रण होने से एनटीपीसी को प्रशासनिक और व्यावसायिक निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। इससे पहले 74:26 के हिस्सेदारी अनुपात के कारण रणनीतिक फैसलों में एमसीडी की सहमति आवश्यक होती थी, जिससे कई बार प्रक्रियात्मक देरी की संभावना बनी रहती थी। अब कंपनी अपनी ग्रीन और वैकल्पिक ऊर्जा रणनीति के तहत वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स को अधिक आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा सकेगी।
जानकारों के मुताबिक लंबी अवधि के दृष्टिकोण से देखा जाए तो एनटीपीसी केवल कोयला आधारित बिजली तक सीमित नहीं रहना चाहती। बता दें कि कंपनी वर्तमान में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अब कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि कंपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद को तेजी से तैयार कर रही है। शुक्रवार को बाजार की निगाहें विशेष रूप से इस शेयर पर टिकी रहेंगी कि क्या यह अपने 400 रुपये के स्तर को पार कर नई ऊंचाई की ओर बढ़ता है या नहीं।
















