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अब साडा बैरियर पर हिमाचल के 10 जिलों की टैक्सियों पर लगा भारी टैक्स, व्यवस्था परिवर्तन के बाद जानें क्या हैं दरें..

Kasol Sada Barrier Charges Hike: मणिकर्ण घाटी के कसोल में अब बाहरी राज्यों के साथ-साथ हिमाचल के अन्य जिलों से आने वाले कमर्शियल वाहनों को भी साडा शुल्क चुकाना होगा, स्थानीय विकास के नाम पर प्रशासन ने लागू किए नए नियम।
SADA Barrier Kasol: अब हिमाचल के 10 जिलों की टैक्सियों पर लगा भारी टैक्स, जानें दरें

SADA Barrier Kasol Tax News: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कसोल में बाहरी राज्यों के साथ-साथ अब प्रदेश के ही अन्य जिलों से आने वाले वाहन चालकों की जेब ढीली होने वाली है। दरअसल, भुंतर-मणिकर्ण सड़क पर स्थित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) बैरियर पर शुल्क वसूली के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नए आदेशों के मुताबिक, अब कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों को छोड़कर हिमाचल के शेष 10 जिलों के वाणिज्यिक वाहनों को भी साडा शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा जारी की गई अधिसूचना के तहत यह नियम 13 मई से प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है। बता दें कि इससे पहले तक इस बैरियर पर केवल बाहरी राज्यों से आने वाली टैक्सियों, बसों और पर्यटक वाहनों से ही साडा शुल्क वसूला जाता था। लेकिन अब हिमाचल नंबर की, टैक्सियों, कारों, ट्रकों और बसों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है, जिससे वाहन चालकों और ऑपरेटरों में हलचल तेज हो गई है।

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साडा बैरियर कसोल द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार, दोपहिया वाहनों के लिए 50 रुपये का शुल्क तय किया गया है। वहीं, टैक्सियों के लिए यह राशि 150 रुपये रखी गई है। एसयूवी (SUV) और अन्य छोटे वाणिज्यिक वाहनों को अब 300 रुपये का भुगतान करना होगा। बड़े वाहनों की बात करें तो प्रदेश में पंजीकृत 13 सीटों तक के वाहनों से 400 रुपये प्रति वाहन और 13 से अधिक सीटों वाली सभी बसों व भारी ट्रकों से 500 रुपये का भारी-भरकम शुल्क लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस निर्णय पर स्पष्टीकरण देते हुए साडा मणिकर्ण के अध्यक्ष एवं सदर विधायक कुल्लू, सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि इस वसूली का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र का बुनियादी ढांचा सुधारना है। उन्होंने बताया कि साडा के माध्यम से एकत्रित की गई इस राशि को मणिकर्ण और कसोल पंचायत के विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। प्रशासन का तर्क है कि पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ते दबाव को संभालने और स्थानीय सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता है।

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हालांकि, नियमों में कुछ श्रेणियों को राहत भी प्रदान की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी प्रकार के सरकारी वाहनों, सैन्य और अर्धसैनिक बलों के वाहनों को इस शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों से भी कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश पंजीकरण संख्या वाले सभी निजी वाहनों को इस टैक्स से छूट दी गई है।

स्थानीय स्तर पर कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिलों में पंजीकृत टैक्सियों को भी बड़ी राहत मिली है; इन दो जिलों के नंबर वाली टैक्सियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन शिमला, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जैसे अन्य जिलों से आने वाली टैक्सियों और बसों को अब कसोल में प्रवेश करने के लिए तय शुल्क चुकाना ही होगा।

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उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से आने वाले टैक्सी ड्राइवरों को अब साडा टैक्स देना होगा। इस नए नियम से प्रदेश भर के टैक्सी ड्राइवर नाराज हैं। उन्हें प्रशासन की अधिसूचना पर गुस्सा आ रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद टैक्सी चालकों में असंतोष के चलते कसोल के साडा बैरियर पर टैक्स वसूली को लेकर टैक्सी ड्राइवरों और बैरियर कर्मचारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। बता दें कि प्रशासन की नई अधिसूचना के अनुसार, मंगलवार से कुल्लू और लाहौल-स्पीति को छोड़कर बाहरी जिलों से आने वाली सभी टैक्सियों से साडा बैरियर पर टैक्स लिया जा रहा है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश की टैक्सियों से यह टैक्स नहीं लिया जाता था।

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