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Himachal News: पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर पूर्व डिप्टी AG विनय शर्मा और पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी पर मामला दर्ज

Former HP Chief Secretary FIR: हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर शिमला पुलिस ने पूर्व डिप्टी एजी विनय शर्मा और पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
Himachal News: पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की शिकायत पर पूर्व डिप्टी AG विनय शर्मा और पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी के खिलाफ बड़ा एक्शन

Himachal News Today: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। हिमाचल प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता की लिखित शिकायत पर शिमला पुलिस थाना में एडवोकेट एवं पूर्व कांग्रेस सरकार में डिप्टी एडवोकेट जनरल (AG) विनय शर्मा और पूर्व रेरा (RERA) चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक, इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 248, 351 और 356(2) को शामिल किया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों के अंतिम भाग में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि मामले में लगाई गई धारा 351 BNS एक संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध की श्रेणी में आती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस मामले में नामजद आरोपियों की किसी भी वक्त गिरफ्तारी भी हो सकती है।

दर्ज कराई गई एफआईआर के विवरण के अनुसार, मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आरोप लगाया है कि 24 मार्च 2026 को विनय शर्मा द्वारा एक शिकायत दायर की गई थी। उस शिकायत में उनके खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए थे, वे पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत, निराधार और भ्रामक थे। मुख्य सचिव का कहना है कि उस शिकायत को केवल और केवल उनकी सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण तरीके से तैयार और प्रसारित किया गया था।

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उल्लेखनीय है कि एडवोकेट एवं पूर्व कांग्रेस सरकार में डिप्टी एडवोकेट जनरल (AG) विनय शर्मा की  शुरुआती शिकायत में मुख्य सचिव के खिलाफ भूमि खरीद, बेनामी संपत्ति रखने, अपने आधिकारिक पद के दुरुपयोग, धन के अज्ञात स्रोतों, संपत्तियों के अवमूल्यन तथा प्रशासनिक कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों को पूर्व मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा किए गए भूमि लेन-देन से संबंधित सभी आवश्यक सूचनाएं और वैधानिक अनुमतियां नियमानुसार संबंधित अधिकारियों एवं राज्य सरकार को समय पर उपलब्ध कराई गई थीं।

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संजय गुप्ता ने दावा किया है कि पूर्व डिप्टी एजी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से सरकारी और आधिकारिक अभिलेखों के विपरीत हैं। इसके साथ ही, सक्षम प्राधिकारी द्वारा की गई जांच में भी उस शिकायत को पूरी तरह गलत, कानूनी रूप से अस्थिर तथा दस्तावेजी साक्ष्यों से असमर्थित पाया गया है। एफआईआर में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा सामान्य प्रशासनिक पत्राचार और नियमित सरकारी प्रक्रियाओं को एक आपराधिक कृत्य के रूप में प्रस्तुत करने का जानबूझकर प्रयास किया गया, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड इन मनगढ़ंत आरोपों का रत्ती भर भी समर्थन नहीं करते हैं।

मुख्य सचिव ने पुलिस को दी शिकायत में जोर देकर कहा है कि उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से लगाए गए इन झूठे आरोपों से उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी, पेशेवर प्रतिष्ठा और उनके संवैधानिक पद की गरिमा को गहरी क्षति पहुंचाने का प्रयास किया गया है। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए शिमला पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मामला दर्ज कर अपनी आगामी कानूनी कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पूरे घटनाक्रम और शिकायत की विस्तृत जांच का जिम्मा सहायक उपनिरीक्षक (ASI) रूप लाल को सौंप दिया गया है। इस मामले में पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी का नाम भी जुड़ने से हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मच गया है।

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