CBI Raids: हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के फंड में हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर CBI ने एक बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में जमा सरकारी पैसों की कथित हेराफेरी के मामले में छह अलग-अलग ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया।
सीबीआई की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह छापेमारी शुक्रवार, 5 जून 2026 को इस जारी जांच के एक हिस्से के रूप में की गई, जिसका उद्देश्य घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को जुटाना था। जांच एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला लगभग 661 करोड़ रुपये के सरकारी फंड को अवैध रूप से दूसरी जगह ट्रांसफर करने और उसे हड़पने से जुड़ा है।
इस वित्तीय हेराफेरी की जद में हरियाणा सरकार के आठ महत्वपूर्ण विभाग आए हैं। इसके अलावा, नगर निगम चंडीगढ़ और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी के फंड में भी इसी तरह की सेंधमारी की बात सामने आई है। इस बड़ी धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद से ही प्रशासनिक और बैंकिंग हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक सीबीआई के अधिकारियों ने शनिवार को भी अपनी तलाशी का दायरा बढ़ाते हुए चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर के आसपास के इलाकों में रेड की। इस कार्रवाई के तहत हरियाणा कैडर के कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के आवासीय परिसरों पर छापे मारे गए। इसके साथ ही, इस मामले में संदिग्ध भूमिका निभाने वाली निजी कंपनी ‘विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड’ और उसके निदेशक के परिसरों को भी खंगाला गया।
जांच एजेंसी ने बताया कि अब तक की तफ्तीश में ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जो अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करते हैं। सीबीआई का आरोप है कि जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों से पता चलता है कि इन सरकारी लोक सेवकों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची थी। इसी साजिश के तहत बैंकों में फर्जी या नियम विरुद्ध खाते खुलवाए गए, सरकारी पैसों को उन खातों में ट्रांसफर किया गया और बाद में उस फंड को पूरी तरह से डायवर्ट यानी दूसरी जगहों पर भेज दिया गया।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों ने इस पूरी गैर-कानूनी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने और अपनी जिम्मेदारी के प्रति निष्क्रियता दिखाने के बदले में अनुचित लाभ या रिश्वत प्राप्त की थी। इस अवैध वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क का खुलासा करते हुए सीबीआई ने बताया कि नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड को इस अपराध की कमाई का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त हुआ था। इसके बाद, कंपनी को मिली इस अवैध राशि को उसके निदेशक के व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
शनिवार को हुई इस विस्तृत छापेमारी के दौरान जांच टीम ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े कागजात और केस से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियां जब्त की हैं, जिनकी स्क्रूटनी की जा रही है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो सीबीआई ने इस पूरी जांच की कमान हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से एक मामला और चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध थाने में दर्ज दो मामलों को अपने हाथ में लेने के बाद संभाली है। ये मामले मुख्य रूप से आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन और बैंक अधिकारियों तथा लोक सेवकों की संलिप्तता से जुड़ी अन्य गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किए गए थे।
शुरुआती जांच और साक्ष्यों को समेटने के बाद, सीबीआई इस मामले में पहले ही अपनी पहली चार्जशीट अदालत में दाखिल कर चुकी है। इस चार्जशीट में मुख्य रूप से हरियाणा के दो बड़े विभागों, हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के लोक सेवकों की भूमिका का पूरा ब्योरा दिया गया है।
एजेंसी ने कोर्ट को सौंपे गए दस्तावेजों में उस काम करने के तरीके को भी विस्तार से समझाया है, जिसके जरिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक में रखे सरकारी पैसे को धोखाधड़ी से निकाला गया था। सीबीआई ने कहा है कि इस मामले में जल्द ही पूरक चार्जशीट भी दायर की जाएगी।

















