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Himachal News: ‘जिन्होंने राम मंदिर को नहीं छोड़ा, वो हिमाचल की जनता का खून चूस लेंगे’; मंत्री विक्रमादित्य सिंह

Vikramaditya Singh on Ram Mandir Theft: मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदे के गबन और भूमि खरीद में अनियमितताओं का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच की मांग की है।
Published on: 4 July 2026
Himachal News: 'जिन्होंने राम मंदिर को नहीं छोड़ा, वो हिमाचल की जनता का खून चूस लेंगे'; मंत्री विक्रमादित्य सिंह

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। शिमला में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने प्रभु श्री राम के मंदिर के नाम पर धन का दुरुपयोग किया है, वे राज्य की जनता के हितों की रक्षा कैसे करेंगे।

मंत्री ने कहा कि देश और प्रदेश की जनता इस पूरे घटनाक्रम को करीब से देख रही है और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन वे स्वयं वहां उपस्थित हुए थे।

विक्रमादित्य सिंह ने रेखांकित किया कि वे पूरे हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस के एकमात्र ऐसे मंत्री थे, जिन्हें इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधि या कांग्रेसी के रूप में नहीं थी, बल्कि यह उनके परिवार और उनके दिवंगत पिता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की भगवान राम के प्रति गहरी और अटूट आस्था का परिणाम थी।

मंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों पर गहरा दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि आज प्रभु राम के पावन मंदिर के नाम पर दोनों हाथों से खुली लूट मची हुई है। उन्होंने दावा किया कि जो भगवाधारी और भाजपा नेता इस पवित्र स्थल को लेकर भी धांधली करने से पीछे नहीं हटे, वे हिमाचल प्रदेश की आम जनता को भी नहीं बख्शेंगे। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि ये लोग हिमाचल प्रदेश में आते हैं, तो यहाँ की भोली-भाली जनता का खून और पैसा दोनों पूरी तरह से निचोड़ लेंगे।

अपने आरोपों के समर्थन में कुछ तथ्यों को रखते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े ट्रस्टी खुद अपने पदों से इस्तीफे दे रहे हैं, जो भीतर चल रही गड़बड़ियों को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल मंदिर के लिए मिलने वाले दान में ही 5 से 10 करोड़ रुपये का सीधा गबन हुआ है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भूमि सौदों में भारी वित्तीय हेराफेरी का गंभीर मुद्दा उठाया।

उन्होंने दावा किया कि रात-रात भर में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई, जिसमें कुछ संपत्तियां पहले बहुत कम दाम में खरीदी गईं और बाद में उन्हें तुरंत 20 करोड़ रुपये जैसे भारी-भरकम दामों में आगे बेच दिया गया। उन्होंने इसे देश का एक बहुत बड़ा घोटाला करार दिया।

वित्तीय अनियमितताओं के इन मामलों पर निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देते हुए लोक निर्माण मंत्री ने केंद्रीय जांच ब्यूरो की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी को सत्तापक्ष का ‘पिंजरे में बंद तोता’ (Parrot Cage) बताते हुए कहा कि इस एजेंसी से किसी निष्पक्ष और ठोस परिणाम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर विषय को लेकर अपने राष्ट्रीय स्तर के पार्टी नेताओं से भी विस्तृत विचार-विमर्श करेंगे। विक्रमादित्य सिंह ने पुरजोर मांग की कि इस पूरे कथित घोटाले की सच्चाई और पारदर्शिता को सामने लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले की गहन और पारदर्शी तरीके से जांच नहीं होगी, तब तक देश की जनता के सामने यह सच नहीं आ पाएगा कि जो लोग खुद को ‘राम भक्त’ बताते थे, वे अचानक ‘राम लुटेरे’ के रूप में कैसे बदल गए। उन्होंने अंत में कहा कि जिन्होंने राम मंदिर जैसी पवित्र जगह को नहीं छोड़ा, वे देश और प्रदेश की जनता को भी किसी हाल में नहीं छोड़ेंगे।

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