Himachal Apple Procurement Scheme: हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए राज्य सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष भी Grade-C सेब की खरीद ₹12 प्रति किलो की तय दर पर जारी रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों से खरीदे जाने वाले सेब की कुल मात्रा पर किसी भी प्रकार की सीमा नहीं लगाई जाएगी। इस फैसले से राज्य के हजारों बागवानों को बड़ी राहत मिली है, जो उपज की सीमित बिक्री को लेकर चिंतित थे।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बागवानों के बीच यह आशंका जताई जा रही थी कि सरकार प्रति किसान सेब के बैग खरीदने की एक सीमा तय कर सकती है। इस तरह की चर्चाओं से किसान इस बात को लेकर परेशान थे कि यदि निर्धारित सीमा से अधिक उपज हुई, तो वे शेष Grade-C सेब को कहां बेचेंगे। हालांकि, सरकार के ताजा रुख ने इन सभी अटकलों और चिंताओं पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है।

बीते दिनों हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत नेगी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य की वर्तमान वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बार सेब की खरीद दर में वृद्धि करना संभव नहीं है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने बागवानों को आश्वस्त किया कि सरकार की ऐसी कोई मंशा या योजना नहीं है, जिसके तहत प्रति किसान खरीदे जाने वाले सेब की मात्रा को सीमित किया जाए। किसान अपनी संपूर्ण Grade-C उपज को तय दर पर सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे।
प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता लाने और व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से इस बार Market Intervention Scheme (MIS) के तहत सेब खरीद की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत किसानों को MIS के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के दौरान बागवानों को अपने बैंक खाते का विवरण और भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी आदि) पोर्टल पर अपलोड करने होंगे।
बागवानी मंत्री के अनुसार, भूमि रिकॉर्ड अपलोड कराने के पीछे मुख्य उद्देश्य खरीद प्रक्रिया की कड़ाई से निगरानी करना है। जमीन के आंकड़ों के माध्यम से यह आसानी से आकलित किया जा सकेगा कि किसी संबंधित किसान के बगीचे से Grade-C सेब का संभावित उत्पादन कितना हो सकता है। इससे वास्तविक किसानों की पहचान होगी और खरीद में होने वाली किसी भी संभावित गड़बड़ी या अनियमितता पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
खरीद व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से संचालित करने के लिए इस वर्ष Himfed को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल Himfed इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था। इस बार HPMC के साथ-साथ Himfed भी विभिन्न खरीद केंद्रों का प्रबंधन संभालेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जगह-जगह छोटे केंद्र खोलने के बजाय क्लस्टर आधारित खरीद केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे निगरानी और प्रबंधन बेहतर हो सके।
इसके अतिरिक्त, राज्य के सेब बागानों में तेजी से फैल रहे अल्टरनेरिया रोग को लेकर भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। किसानों द्वारा घटिया व नकली कीटनाशकों की आशंका जताए जाने के बाद बागवानी विभाग ने मैदानी स्तर पर जांच टीमें तैनात कर दी हैं। ये टीमें बाजार और बागानों से कीटनाशकों के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेज रही हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि नकली दवाएं बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


















