Prajasatta Side Scroll Menu
IEC University Bahra University - Shimla Hills

IIT Mandi Poster Controversy: आईआईटी मंडी में जन्माष्टमी समारोह में भगवद्गीता के विवादित पोस्टर पर मचा बवाल, संस्थान ने गठित की जांच कमेटी

आईआईटी मंडी परिसर में जन्माष्टमी समारोह के दौरान भगवद्गीता आधारित पोस्टर लगाया गया, जिसमें शूद्रों की भूमिका 'उच्च वर्गों की सेवा' बताई गई। संस्थान ने मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई है।
IIT Mandi Poster Controversy: आईआईटी मंडी में जन्माष्टमी समारोह में भगवद्गीता के विवादित पोस्टर पर मचा बवाल, संस्थान ने गठित की जांच कमेटी

IIT Mandi Poster Controversy: आईआईटी मंडी परिसर में हाल ही में आयोजित जन्माष्टमी समारोह के दौरान एक विवादित पोस्टर सामने आने से नया विवाद शुरू गया है। इस पोस्टर में भगवद्गीता के आधार पर समाज को चार वर्णों में विभाजित किया गया था, जिसमें शूद्रों की भूमिका को लेकर आपत्तिजनक बातें लिखी थीं। मामला तूल पकड़ने के बाद संस्थान प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया है।

संस्थान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह जन्माष्टमी कार्यक्रम पूरी तरह से छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था। यह आईआईटी मंडी का आधिकारिक रूप से प्रायोजित या समर्थित कार्यक्रम नहीं था। गठित की गई जांच कमेटी यह पता लगाएगी कि यह विवादित पोस्टर किसने लगाया, इसके पीछे क्या मुख्य वजह थी और इसे लगाने वाले कौन लोग थे। कमेटी के निष्कर्ष और रिपोर्ट के आधार पर संस्थान द्वारा नियमों के तहत आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

Kullu Dussehra 2026 Celebration

पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संस्थान ने जांच समिति में विभिन्न सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया है। इस कमेटी में फैकल्टी सदस्यों के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधि भी प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियों और पोस्टरों को संस्थान किसी भी रूप में सहन या समर्थन नहीं करता है और अपनी निर्धारित नीतियों के अनुसार ही निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।

विवादित पोस्टर को संस्थान के मुख्य ऑडिटोरियम के बाहर लगाया गया था, जिसका शीर्षक ‘भगवद्गीता- द टाइमलेस विजडम’ रखा गया था। इस पोस्टर में समाज के चार विभाजनों का जिक्र करते हुए ब्राह्मणों की भूमिका ईश्वर का संदेश फैलाना, क्षत्रियों की भूमिका समाज और आध्यात्मिकता की रक्षा करना, वैश्यों की भूमिका अर्थव्यवस्था चलाना और दूसरों की सहायता करना बताई गई थी। इसके साथ ही, इसमें शूद्रों की भूमिका को उच्च वर्गों की सेवा करना बताया गया था।

पोस्टर में भगवद्गीता के एक विशिष्ट श्लोक का हवाला भी दिया गया था, जिसमें मानव समाज के चार विभाजनों को प्रकृति के तीन गुणों और उनके आधार पर तय होने वाले कर्मों से जोड़ा गया था। इस मामले पर बात करते हुए आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि यह पोस्टर छात्रों के एक कार्यक्रम का हिस्सा था और कुछ छात्रों ने भगवद्गीता की अपने तरीके से व्याख्या की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्थान समानता, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक सोच और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ पहले भी कई बयानों को लेकर चर्चा और विवादों में रहे हैं। रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विशेषज्ञ प्रोफेसर बेहरा ने साल 2023 में छात्रों से मांस का सेवन न करने का संकल्प लेने की अपील की थी। उस दौरान उन्होंने दावा किया था कि हिमाचल प्रदेश में लगातार सामने आ रही भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाएं जानवरों के प्रति बढ़ती क्रूरता का परिणाम हैं।

इसके अलावा, आईआईटी मंडी के निदेशक पद पर अपनी नियुक्ति के कुछ समय बाद उनका एक अन्य वीडियो भी सार्वजनिक हुआ था। उस वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने पवित्र मंत्रों का जाप करके अपने एक मित्र के परिवार को बुरी आत्माओं के साये से मुक्ति दिलाने में सहायता की थी। प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा का इस्कान संस्था और भगवद्गीता के साथ पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। वह पिछले लगभग 27 वर्षों से युवाओं को भगवद्गीता के माध्यम से शांति और जीवन के सिद्धांतों की शिक्षा दे रहे हैं तथा संस्थान के भीतर तीन क्रेडिट का भगवद्गीता पाठ्यक्रम भी संचालित करते हैं।

Bhagavad Gita ControversyCaste RowEducation NewsIIT MandiLaxmidhar Behera

Join WhatsApp

Join Now