Mandi News: हिमाचल प्रदेश जिला मंडी के सरकाघाट स्थित माननीय विशेष न्यायाधीश की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एससी-एसटी एक्ट और जानलेवा हमले के एक बहुचर्चित मामले में पांच दोषियों को कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। उप जिला न्यायवादी राजीव शर्मा द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अदालत ने रामलाल प्रकरण में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी रामलाल, उनकी पत्नी सुषमा देवी, उनके भाई नंदलाल और दोनों बेटों विशाल तथा विकास को दोषी करार दिया है।
विशेष अदालत ने सभी पांचों दोषियों को एससी-एसटी अधिनियम (SC/ST Act) के तहत 5 वर्ष के कठोर कारावास और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, वादी पक्ष को गंभीर चोटें पहुंचाने के जुर्म में दोषियों को 4 वर्ष का कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अदालत ने उपद्रव व दंगे से जुड़ी धाराओं के तहत दोषियों को 2 वर्ष का कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना तथा वादीगण को साधारण चोटें पहुंचाने के अपराध में 1 वर्ष का कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को सुनाई गई ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला मंडी जिले के धर्मपुर क्षेत्र का है और घटना 7 जुलाई 2021 की है। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, वादी सोनू, उनकी माता रोशनी देवी और पिता अच्छर सिंह अपनी जमीन पर काम कर रहे थे। उन्होंने अपनी साथ लगती जमीन आरोपी पक्ष को बेची हुई थी, जिस पर आरोपियों ने अपना मकान बना रखा था।
घटना के दिन जैसे ही वादीगण अपनी निजी जमीन पर काम करने के लिए पहुंचे, तभी आरोपीगण घातक हथियारों और लोहे की रॉड से लैस होकर मौके पर आ धमके। आरोपियों ने बिना किसी उकसावे के वादी परिवार पर अचानक हमला बोल दिया। इस हिंसक हमले में सोनू के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों को भी साधारण चोटें पहुंचीं।
हमले के दौरान आरोपियों ने वादी पक्ष को जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए जमकर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकियां भी दीं। इस दर्दनाक घटना के बाद धर्मपुर पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी (IO) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच पूरी कर चालान अदालत में पेश किया था। उप जिला न्यायवादी राजीव शर्मा ने बताया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।


















