HP Teacher Recruitment 2026: शिमला जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नोगली में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने राज्य के विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण और विकास कार्यों को गति देना है।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के वर्तमान कार्यकाल के दौरान अब तक 10 हजार से अधिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि आगामी छह महीनों के भीतर राज्य में 4,000 और शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार का ध्यान ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में शैक्षणिक स्तर को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 150 से अधिक सीबीएसई (CBSE) स्कूल खोले गए हैं, जिनमें लगभग 2,000 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इन विद्यालयों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उनके घर-द्वार के निकट ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध 300 विद्यालयों को ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
शैक्षणिक सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2021 में पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान गुणात्मक शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 21वें स्थान पर था। वर्तमान सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश अब सुधरकर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं और इनके विकास में बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और अटल मेडिकल सुपर स्पेशिटीज संस्थान, चमियाना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। एम्स की तर्ज पर आधुनिक मशीनें स्थापित की जा रही हैं तथा 19 वर्ष पुरानी पुरानी मशीनों को चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है। इसके अलावा, राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए हाल ही में 500 चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।
कर्मचारी कल्याण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ प्रदान किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक कांग्रेस सरकार सत्ता में है, ओपीएस को बंद नहीं किया जाएगा। वहीं, आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार एक विशेष नीति तैयार कर रही है, जिसे आने वाले समय में लागू किया जाएगा। करुणामूलक आधार पर रोजगार के पात्र मामलों में से लगभग 70 प्रतिशत मामलों का समाधान कर आवेदकों को रोजगार दिया जा चुका है।
पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार को विरासत में 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और कर्मचारियों से संबंधित लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां मिलीं। पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम छह महीनों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की घोषणाएं कीं, लेकिन उनके लिए आवश्यक स्टाफ और आधारभूत ढांचा उपलब्ध नहीं कराया। उन्होंने कहा कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का वास्तविक अर्थ गरीब की आवाज सुनना और उसकी आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को लागू करना है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की गई है, जिससे पशुपालकों की आय बढ़ी है। आगामी 1 दिसंबर से दूध के न्यूनतम समर्थन मूल्य में और वृद्धि की जाएगी। इसके साथ ही, इसी माह ‘अपना परिवार, सुखी परिवार’ योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह तथा पात्र परिवारों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है।
अंतरराज्यीय और जल विद्युत परियोजनाओं के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने बताया कि किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना में हिमाचल के हितों के अनुरूप समझौता लागू कराया गया, जिससे बिजली उत्पादन के लिए 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये के संभावित व्यय की बचत हुई है। इस परियोजना से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 1,500 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भी इसी तर्ज पर समझौता चाहता था, लेकिन केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में 401 करोड़ रुपये राज्य के खजाने में आए हैं और कड़छम वांगतू परियोजना से रॉयल्टी के रूप में प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये की आय सुनिश्चित हुई है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 15 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की। सुख आश्रय योजना के अंतर्गत तीन लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए 3-3 लाख रुपये तथा एक लाभार्थी को 1 लाख रुपये की किस्त सौंपी गई। एक अन्य लाभार्थी को 16 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।
जनसभा में महिला मंडलों को सामान खरीदने के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने की घोषणा भी की गई। इस अवसर पर सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंदलाल, हिमकोन अध्यक्ष विकेश चौहान, मिल्कफेड अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, कामगार कल्याण बोर्ड अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर, राज्य सहकारी बैंक अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, उपायुक्त अनुपम कश्यप, एसपी गौरव सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


















