Mandi Digital Arrest Case: हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में इन दिनों साइबर अपराध के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे आम नागरिकों को कानून और सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसा ही एक बेहद गंभीर मामला मंडी जिले के धर्मपुर से सामने आया है, जहां शातिर ठगों ने एक महिला को निशाना बनाया।
जानकारी के मुताबिक साइबर ठगों ने पीड़िता को करीब एक महीने से अधिक समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। आरोपियों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में फंसाने का डर दिखाया और उससे कुल 15.50 लाख रुपये ठग लिए। खुद को सीबीआई, पुलिस और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी बताकर आरोपियों ने महिला को लगातार डराया-धमकाया और उस पर दबाव बनाए रखा। इतना ही नहीं, बदमाशों ने पीड़िता को उसके पति और बेटे को अगवा करने तथा उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी।
पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, पीड़िता को पहली बार 15 अगस्त को फोन आया था। फोन करने वाली महिला ने खुद को दिल्ली पुलिस की अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उसके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है। इसके तुरंत बाद पीड़िता की बात एक कथित पुलिस अधिकारी से करवाई गई। अपनी बात को सच साबित करने के लिए वीडियो कॉल के दौरान वर्दी पहने एक व्यक्ति को दिखाया गया, जिससे महिला को पूरा विश्वास हो गया कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में पुलिस अधिकारी ही है।
इसके बाद साइबर ठगों ने महिला को अपने जाल में पूरी तरह फंसा लिया। उन्होंने पीड़िता को सख्त निर्देश दिए कि वह इस मामले की जानकारी अपने किसी भी परिजन, रिश्तेदार या बैंक अधिकारी को न दे। आरोपियों ने दावा किया कि उसके सभी बैंक खातों और जरूरी दस्तावेजों की आरबीआई के माध्यम से जांच की जा रही है। महिला को यह भरोसा भी दिलाया गया कि जांच प्रक्रिया पूरी होने और दस्तावेज कोर्ट में जमा करने के बाद उसके खाते से भेजी गई पूरी रकम वापस लौटा दी जाएगी।
पीड़िता के मुताबिक, साइबर ठगों ने करीब एक महीने से अधिक समय तक उसे इसी तरह कड़ी निगरानी में रखा। आरोपियों द्वारा लगातार फोन और वीडियो कॉल के माध्यम से उस पर भारी मानसिक दबाव बनाया जाता रहा। कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और परिवार को नुकसान पहुंचाने का खौफ दिखाकर महिला को इस कदर भयभीत कर दिया गया कि उसने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दी।
डर के माहौल में महिला ने दो अलग-अलग बार में कुल 15.50 लाख रुपये साइबर ठगों के खातों में जमा करवा दिए। रकम भेजने के बाद जब उसे परिस्थितियों पर संदेह हुआ, तो महिला ने आखिरकार अपने परिजनों को पूरी आपबीती बताई। परिवार ने तुरंत महिला को संभाला और मामले की शिकायत पुलिस को दी। शिकायत मिलते ही साइबर पुलिस थाना मंडी में एफआईआर दर्ज कर ली गई। फिलहाल मामले की आगामी जांच पुलिस थाना धर्मपुर के प्रभारी एवं जांच अधिकारी द्वारा की जा रही है।
मामले की पुष्टि करते हुए एसपी मंडी विनोद कुमार ने बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी माध्यमों की गहनता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर मानसिक दबाव में लेते हैं, जिससे लोग डर के कारण उनकी बातों में आ जाते हैं।
एसपी मंडी ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या रकम बिल्कुल साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, आरबीआई या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करता है और पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो सबसे पहले उसकी सत्यता की जांच करें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होने या संदेह होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं ताकि समय रहते ठगी की रकम को रोकने या रिकवर करने की संभावना बनी रहे।


















