Himachal High Court Indo China Road: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर बनाई जा रही रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों द्वारा पैदा की जा रही रुकावट पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला किन्नौर के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को तुरंत हस्तक्षेप करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्माण स्थल पर किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत रोका जाए और कार्य में जुटी कंपनी को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए। यह आदेश न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ ने “बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड” द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के पश्चात जारी किए हैं।
याचिकाकर्ता बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लिए अत्यधिक ऊंचाई वाली सामरिक सड़क का निर्माण कर रही है। सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के दृष्टिगत इस सड़क परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना बेहद अनिवार्य है, जिसमें किसी भी प्रकार का विलंब सुरक्षा कारणों से जोखिम भरा हो सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ से गिरे कुछ मलबे के नदी में गिरने से जलशक्ति विभाग का एक वाटर स्टोरेज टैंक क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य का विरोध करना और प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इसके बाद मामला गहराता चला गया और निर्माण कार्य प्रभावित होने लगा।
अदालत के संज्ञान में यह तथ्य लाया गया कि कंपनी ने जनहित और कार्य को शांतिपूर्ण ढंग से सुचारू रखने के लिए अपनी संविदात्मक सीमाओं से बाहर जाकर स्थानीय प्रशासन और लोगों की मदद की। कंपनी ने न केवल नए वाटर टैंक के निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराई, बल्कि अपने स्वयं के खर्च पर डीसिल्टिंग चेंबर, डैम/हेड वीयर बनाने और लगभग 2400 मीटर लंबी एचडीपीई (HDPE) पाइपलाइन, पंप और डीजी सेट देने पर भी सहमति जताई।
कंपनी द्वारा इतनी व्यापक आर्थिक और तकनीकी सहायता देने के बावजूद, कुछ स्थानीय लोग इस बात पर अड़ गए कि डीसिल्टिंग चेंबर के निर्माण का ठेका उनकी पसंद के ही व्यक्ति को दिया जाए। अपनी इस अनुचित मांग को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के इस अति-संवेदनशील प्रोजेक्ट के काम को पूरी तरह से रोक दिया। कंपनी ने स्थानीय प्रशासन से बार-बार सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन जब प्रशासन से कोई ठोस मदद नहीं मिली, तो अंततः कंपनी को न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हाई कोर्ट ने किन्नौर के डीसी और एसपी को आदेश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि स्थानीय निवासियों द्वारा सड़क निर्माण में अब कोई बाधा न आए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रशासन पहले स्थानीय लोगों से बातचीत कर मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाले। यदि इसके बाद भी लोग सहयोग करने से इनकार करते हैं और काम रोकते हैं, तो उनके नाम और पूरा विवरण तुरंत हाई कोर्ट को भेजा जाए, ताकि उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
अदालत ने सख्त लहजे में साफ किया कि जिला प्रशासन या स्थानीय लोगों द्वारा इस आदेश का किसी भी रूप में उल्लंघन किए जाने पर इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना (Contempt of Court) माना जाएगा, जिसके गंभीर दंडात्मक परिणाम होंगे। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को तय की है और राज्य सरकार को अपना स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान किया है।


















