Neeraj Bharti High Court Case: हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और पूर्व कांग्रेस नेता नीरज भारती के सोशल मीडिया अकाउंट को भारत में प्रतिबंधित किए जाने का मामला अब कानूनी रूप से गहराता जा रहा है। उनके सोशल मीडिया अकाउंट को भारत बंद किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पहली सुनवाई हुई। अदालत ने इस संवेदनशील मामले पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह याचिका ‘CWP No. 16047 of 2026, Neeraj Bharti & Anr. बनाम State of H.P. & Ors.’ के नाम से पंजीकृत की गई है। 16 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर-1 में इस मामले की पहली औपचारिक सुनवाई संपन्न हुई। याचिकाकर्ता की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता और केंद्र सरकार की ओर से उप सॉलिसिटर जनरल अदालत के समक्ष उपस्थित हुए।
सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत के ध्यान में लाया कि मेमो ऑफ पार्टीज में तकनीकी त्रुटि के कारण भारत संघ को दो बार प्रतिवादी बना दिया गया है। इस पर अदालत ने आवश्यक संशोधन करने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके पश्चात हाईकोर्ट ने मामले के प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। राज्य सरकार की ओर से पेश उप महाधिवक्ता ने प्रतिवादी संख्या 1 से 5 के लिए तथा अन्य अधिवक्ताओं ने प्रतिवादी संख्या 6 व 7 के लिए नोटिस स्वीकार कर लिए, जबकि प्रतिवादी संख्या 8 के लिए नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 1 से 5 को कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ताओं की सामग्री को हटाने के संबंध में प्रतिवादी संख्या 8 को जारी किए गए ‘टेक-डाउन इंटिमेशन’ की प्रति अदालत में प्रस्तुत की जाए। इसके साथ ही अदालत ने उस लिखित आदेश की कॉपी भी मांगी है जिसके तहत संबंधित अधिकारी को यह कार्रवाई करने के लिए अधिकृत किया गया था।
हाईकोर्ट की पीठ ने अधिकारी का नाम, पदनाम, प्रयुक्त कानूनी प्रावधान, कथित गैरकानूनी कृत्य और सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 3(1)(d) के तहत की गई आवधिक समीक्षा का पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टेकडाउन आदेश जारी करने वाले अधिकारियों के नाम, पदनाम और अन्य संबंधित विवरण सहित पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, सख्त लहजे में पूछा कि मेटा को संबंधित प्रोफाइल बंद करने के निर्देश किन कानूनी प्रावधानों के तहत जारी किए गए, इसका पूरा रिकॉर्ड भी 2 नवंबर से पहले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।
पीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली तारीख से पहले संबंधित रिकॉर्ड और आदेश जारी करने वाले अधिकारियों का पूरा विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले में फैसला कर दिया जाएगा।
बता दें कि यह संपूर्ण विवाद उस समय शुरू हुआ था जब नीरज भारती ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था। पद छोड़ने के पश्चात वे सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी, संगठन तथा राज्य सरकार के विरुद्ध बेहद आक्रामक टिप्पणियां कर रहे थे। इस तीखे सार्वजनिक बयानबाजी के बीच ही अचानक उनके सोशल मीडिया अकाउंट को भारत में देखने के लिए ब्लॉक कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया जाता है, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आगे विचार किया जाएगा। फिलहाल कोर्ट ने अकाउंट बहाली पर अंतिम फैसला न देते हुए केवल प्रक्रियात्मक रिकॉर्ड मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।


















