Gold Silver Outlook: सोने और चांदी के भाव पिछले कई हफ्तों से एक सीमित दायरे में बने हुए हैं। मार्केट में चल रहे इस कंसोलिडेशन फेज के बीच निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कीमती धातुओं में जल्द ही नई तेजी देखने को मिलेगी या फिर कीमतों में गिरावट का दौर जारी रहेगा। इस विषय पर कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि सोने के लिए ₹1.40 लाख का स्तर एक मजबूत और अहम सपोर्ट की तरह काम कर रहा है।
ऐसे में निवेशकों को घबराहट में आकर बिकवाली यानी पैनिक सेलिंग करने से बचना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों का सुझाव है कि 3 से 4 महीने के मध्यम अवधि के नजरिए के साथ धीरे-धीरे निवेश (सिप या चरणबद्ध खरीदारी) करने की रणनीति अपनाना फिलहाल सबसे सही कदम होगा। वैश्विक और घरेलू मोर्चे पर बदल रहे परिस्थितियों के बीच बाजार के रुझान में भी बड़ा बदलाव आया है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, वित्तीय बाजार अब काफी हद तक जियोपॉलिटिकल खबरों का आदी हो चुका है। एक समय था जब क्रूड ऑयल और सोने की चाल एक जैसी दिशा में दिखाई देती थी, लेकिन अब बाजार का पूरा परिदृश्य बदल गया है। यूक्रेन-रूस युद्ध और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव का असर भी अब बुलियन मार्केट पर पहले जितना गहरा नहीं पड़ रहा है।
अब निवेशकों और विश्लेषकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी इन्फ्लेशन डेटा (महंगाई के आंकड़े), अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और डॉलर इंडेक्स पर टिकी हुई है। यही प्रमुख आर्थिक कारक आने वाले दिनों में सोने और चांदी की अगली चाल और दिशा तय करेंगे।
घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का सोने पर सीधा और बड़ा असर सीमित रहने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, भारतीय रुपये की विनिमय दर पर पैनी नजर रखना बेहद आवश्यक होगा। वर्तमान में रुपया 94 से 97 के दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक यह दायरा ऊपरी या निचले स्तर पर नहीं टूटता, तब तक बुलियन मार्केट में किसी बड़े एकतरफा ट्रेंड की संभावना काफी कम है।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतें भी सोने-चांदी की दैनिक चाल को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाएंगी। लंबी अवधि के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सोने का स्ट्रक्चर काफी मजबूत और सकारात्मक बना हुआ है। दुनिया भर में जारी डी-डॉलराइजेशन की बहस, वैश्विक सेंट्रल बैंकों द्वारा की जा रही सोने की आक्रामक खरीदारी और गोल्ड-बैक्ड करेंसी जैसे विचार बुलियन के हक में काम कर रहे हैं।
विशेष रूप से चीन, भारत और पोलैंड जैसे देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। हालांकि रूस की ओर से बाजार में सोना बेचने की खबरें आई हैं, लेकिन इसके बावजूद दुनिया भर में सोने की कुल मांग इसकी आपूर्ति के मुकाबले काफी अधिक बनी हुई है। यही कारण है कि विश्लेषक मान रहे हैं कि फिलहाल सोने की कीमतों में किसी बहुत बड़ी गिरावट की गुंजाइश न के बराबर है।


















