NHPC Project Water Leakage: हिमाचल प्रदेश के सैंज स्थित एनएचपीसी (NHPC) की पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-2 के एडिट-5 से अचानक पानी का अत्यधिक रिसाव शुरू हो गया। रिसाव के साथ बहकर आए मटमैले पानी ने पालचरा गांव को अपनी चपेट में ले लिया। पानी के अचानक और तेज बहाव के कारण गांव के कई मकानों और खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। रिसाव की खबर मिलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया और पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
स्थानीय निवासियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मटमैले पानी का बहाव इतना तेज था कि दो मकान पूरी तरह से मलबे और पानी के नीचे दब गए। इसके अलावा, एक अन्य मकान को भी गंभीर क्षति पहुंची है। गांव में स्थित दो दुकानों और दो अन्य रिहायशी मकानों के भीतर भी पानी घुस गया, जिससे वहां रखा सामान पूरी तरह जलमग्न हो गया। पानी के साथ आए गाद और मलबे के कारण ग्रामीणों के कृषि खेतों को भी व्यापक नुकसान होने की सूचना मिली है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के लोगों ने तुरंत सतर्कता दिखाई और आपसी समन्वय स्थापित किया। ग्रामीणों ने मिलकर प्रभावित परिवारों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का राहत कार्य शुरू किया। यह पूरा बचाव अभियान रात करीब 11 बजे चलाया गया, जब प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया। अचानक आए इस संकट के कारण कई परिवारों को अपनी रात अपने घरों के बजाय दूसरे ग्रामीणों के आसरे बितानी पड़ी। इस घटना के बाद से प्रभावित परिवारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी लगातार चिंता और भय बना हुआ है।
गांव के लोगों ने स्थानीय प्रशासन और एनएचपीसी परियोजना प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि पालचरा गांव के प्रभावित क्षेत्र का तुरंत आधिकारिक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीमें स्थल पर पहुंचकर नुकसान का विस्तृत और सटीक आकलन करें ताकि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द आवश्यक वित्तीय और व्यावहारिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
इसके साथ ही, ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन और प्रशासन से भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। निवासियों का कहना है कि एडिट-5 से होने वाले रिसाव पर स्थायी नियंत्रण पाया जाए, ताकि दोबारा ऐसी विपरीत स्थिति पैदा होने पर जान-माल के किसी भी बड़े नुकसान को समय रहते रोका जा सके। फिलहाल इस पानी के रिसाव से कुल कितने का नुकसान हुआ है, इसका पूरा ब्योरा आना बाकी है। प्रशासन और एनएचपीसी अधिकारियों द्वारा संयुक्त निरीक्षण किए जाने के बाद ही नुकसान की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।


















