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ऊना की जलवायु में रास आ रहा ड्रैगन फ्रूट, किसानों के लिए बढ़ रहा स्वरोजगार और कमाई का रास्ता

Dragon Fruit Cultivation: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की जलवायु विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट के अनुकूल साबित हो रही है। कम पानी और जानवरों से कम नुकसान के कारण किसान पारंपरिक खेती छोड़ इसे व्यावसायिक विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
Dragon fruit farming in Himachal: ऊना की जलवायु में रास आ रहा ड्रैगन फ्रूट, किसानों के लिए बढ़ रहा स्वरोजगार और कमाई का रास्ता

Dragon Fruit Farming in Himachal: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में पारंपरिक खेती के साथ अब ड्रैगन फ्रूट की खेती भी किसानों के लिए आय का नया विकल्प बनती जा रही है। जिले की जलवायु इस विदेशी फल की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है, जिसके चलते प्रगतिशील किसान धीरे-धीरे इसकी ओर रुख कर रहे हैं।

ड्रैगन फ्रूट की खासियत यह है कि इसकी खेती में पानी की आवश्यकता कई अन्य फसलों की तुलना में कम होती है। साथ ही, बेसहारा पशुओं और जंगली जानवरों से फसल को होने वाले नुकसान की आशंका भी अपेक्षाकृत कम रहती है। ऐसे में किसानों के लिए यह फसल सीमित संसाधनों के बीच खेती का एक वैकल्पिक माध्यम बन सकती है।

ड्रैगन फ्रूट की बाजार में अच्छी मांग और इसकी कीमतों के कारण इसकी खेती को व्यावसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि शुरुआती चरण में पौधों के लिए ट्रेलिस सिस्टम तैयार करने सहित कुछ आधारभूत ढांचे पर खर्च करना पड़ता है, लेकिन उत्पादन शुरू होने के बाद किसान लंबे समय तक इससे आय प्राप्त कर सकते हैं।

जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की ओर से भी प्रयास किए गए हैं। मनरेगा के माध्यम से बागवानों को सहायता उपलब्ध कराने की पहल के बाद किसानों के बीच इस फसल को लेकर रुचि बढ़ी है।

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वहीं, ऊना के बेहड़ बिट्ठल में ड्रैगन फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट की दिशा में चल रहे कार्य को भी इस खेती के लिए संभावित बाजार से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पाद की खपत और प्रसंस्करण की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

कृषि विशेषज्ञों और किसानों के लिए अब चुनौती यह है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती को वैज्ञानिक तरीके से अपनाया जाए और बेहतर उत्पादन के साथ बाजार तक पहुंच सुनिश्चित की जाए। यदि खेती, प्रसंस्करण और विपणन के बीच बेहतर तालमेल बनता है तो ऊना में ड्रैगन फ्रूट किसानों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है।

बता दें कि जिला ऊना के इच्छुक किसान व बागवान अब ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए बैंक से ऋण सुविधा प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले उपलब्ध नहीं थी। किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए 6,32,080 रुपये प्रति एकड़ की दर से बैंक से ऋण ले सकते हैं। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से 3 लाख रुपये तक का ऋण 4 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध है, जबकि इससे अधिक की राशि पर सामान्य ब्याज दर लागू होगी।

उधर, जिला ऊना के बेहड़ बिट्ठल में विश्व बैंक के सहयोग से ड्रैगन फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की आवश्यकता होगी। बैंक ऋण की सुविधा मिलने से जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा मिलेगा और बागवानों को आर्थिक लाभ होगा।

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