Jaipur IAOHNS 2026: इंडियन एकेडेमी ऑफ ओटोलैरिंगोलॉजी और हेड-नेक सर्जरी (IAOHNS) की 12वीं कॉन्फ्रेंस का शुक्रवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), झालाना, जयपुर में विधिवत शुभारंभ हुआ। 25 से 27 सितंबर तक आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में ENT, हेड एंड नेक सर्जरी, न्यूरोटोलॉजी, राइनोलॉजी, ओटोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, एलर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों से जुड़े विषयों पर देशभर से आए विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं। पहले दिन पांच अलग-अलग हॉल में व्याख्यान, सिम्पोजियम, पैनल डिस्कशन, गेस्ट लेक्चर और इंस्ट्रक्शनल कोर्स आयोजित किए गए, जिसमें चिकित्सकों, विद्यार्थियों और इंजिनीयर्स ने भाग लिया।
एसएमएस अस्पताल के कान, नाक, गला रोग विभाग के वरिष्ठ आचार्य और कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि, “कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञों की कॉन्फ्रेंसों में रोबोट की उपस्थिति बहुत ही दुर्लभता से देखी जाती है। पूरे देश में कान-नाक-गला रोग और सिर, मुख व गले के रोगों में रोबोटिक सर्जरी का प्रचलन उतना नहीं हुआ है जितना कि विदेशों में व्याप्त है।”
उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस में रोबोटिक सर्जरी के साथ नई तकनीकों और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक चर्चा की जा रही है। रोबोटिक सर्जरी में बेहतर विजिबिलिटी, उपकरणों की मूवमेंट और सूक्ष्म कार्यक्षमता जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पहले दिन AI और स्कल बेस सर्जरी पर विशेष चर्चा
कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में मुख्य सभागार में नियोनेटल ब्रेन डेवलपमेंट विषय पर डॉ. अरुण कुमारेंदु का की-नोट व्याख्यान आयोजित किया गया। इसके बाद डॉ. राजेश विश्वकर्मा ने भारत में नवजात शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक हियरिंग लॉस मैनेजमेंट में लाइफस्टाइल अप्रोच पर व्याख्यान दिया। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति ओरेशन में मेजर जनरल एम.डी. वेंकटेश ने क्लीनिकल प्रैक्टिस से एकेडमिक लीडरशिप तक के सफर और इससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्याख्यान दिया।
ENT सर्जन के लिए Collaborative Practice पर विशेष सिम्पोजियम आयोजित किया गया, जिसमें कार्डियोपल्मोनरी बायपास, EXIT प्रक्रिया, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी, हेड एंड नेक रिकंस्ट्रक्शन, एंडोस्कोपिक एंटीरियर स्कल बेस सर्जरी, प्री-ऑपरेटिव एम्बोलाइजेशन तथा डेटा मैनेजमेंट और एनालिसिस जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और Head & Neck Oncology पर विशेष गेस्ट लेक्चर हुआ। इसमें सिर और गर्दन के कैंसर के निदान, उपचार और देखभाल में AI के वर्तमान उपयोग तथा भविष्य की संभावनाओं पर वैज्ञानिक जानकारी साझा की गई।
चक्कर और न्यूरोटोलॉजी पर भी विशेषज्ञ चर्चा
पहले दिन न्यूरोटोलॉजी सत्र में कान के संतुलन तंत्र यानी वेस्टिबुलर सिस्टम और मस्तिष्क से जुड़े विभिन्न प्रकार के चक्कर (Dizziness/Vertigo) तथा संतुलन संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। इस दौरान चक्कर आने के कारणों, संतुलन तंत्र से जुड़ी जटिलताओं और उनके चिकित्सकीय मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाया गया।
डॉ. पवन सिंघल ने मेनियर रोग (Meniere’s Disease) पर तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह आंतरिक कान (Inner Ear) से जुड़ा एक विकार है, जिसमें गंभीर चक्कर यानी वर्टिगो, कानों में घंटी बजने या आवाज आने जैसी समस्या (टिनिटस) और सुनने में कमी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
बच्चों, थायरॉयड और हेड एंड नेक सर्जरी पर फोकस
कॉन्फ्रेंस के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में बच्चों और नवजातों में नाक, कान और गला (ENT) रोगों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इसमें बाल चिकित्सा ट्रेकियोस्टोमी, पॉइंट-ऑफ-केयर अल्ट्रासाउंड, बच्चों के वायुमार्ग, निगलने में कठिनाई, एनआईसीयू में सुनने की स्क्रीनिंग, लैरिंगोमैलेशिया और सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में ईएनटी मूल्यांकन सहित अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी साझा की गई।
वहीं, थायरॉयड और हेड एंड नेक सर्जरी से जुड़े सत्रों में नोड्यूलर गोइटर सर्जरी, थायरॉयड सर्जरी, पोस्ट-लैरिंगेक्टोमी रिहैबिलिटेशन और ट्रांस-वेस्टिबुलर एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी की आधुनिक तकनीकों और उनकी बारीकियों पर चर्चा की गई।
ट्रांस-वेस्टिबुलर एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी थायरॉयड ग्रंथि को बाहर निकालने की एक आधुनिक और उन्नत सर्जिकल तकनीक है, जिसे आम भाषा में ‘स्कारलेस’ (Scarless) यानी बिना निशान वाली थायरॉयड सर्जरी भी कहा जाता है। इसमें मरीज के गले पर पारंपरिक चीरा नहीं लगाया जाता, जिससे गर्दन पर सर्जरी का दिखाई देने वाला निशान नहीं रहता।
एंडोस्कोपिक ईयर सर्जरी और राइनोलॉजी पर व्याख्यान
कॉन्फ्रेंस में एंडोस्कोपिक कान की सर्जरी पर विशेष वैज्ञानिक सत्र आयोजित किया गया। इसमें चेहरे की नस को दबाव से मुक्त करने की सर्जरी, कान के पर्दे की एंडोस्कोपिक सर्जरी, कान की हड्डी की एंडोस्कोपिक सर्जरी और स्टेपेडोटॉमी जैसी आधुनिक सर्जिकल तकनीकों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की तथा इनके व्यावहारिक पहलुओं और उपचार में उपयोग की जानकारी साझा की।
राइनोलॉजी सत्र में एंटीरियर स्कल बेस, एंडोस्कोपिक स्कल बेस सर्जरी के बाद होने वाली नाक संबंधी जटिलताओं, नाक के रास्ते एंडोस्कोपिक ऑर्बिटल डीकंप्रेशन और पोस्टेरियर नेजल न्यूरक्टॉमी जैसी महत्वपूर्ण सर्जिकल तकनीकों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इस दौरान स्कल बेस और नाक से जुड़ी जटिल स्थितियों के उपचार में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीकों के उपयोग पर जानकारी साझा की गई।
एलर्जी और आधुनिक उपचार तकनीकों पर चर्चा
एलर्जी एवं राइनोलॉजी सत्र में एलर्जिक राइनाइटिस और इम्यूनोथेरेपी से जुड़े आधुनिक उपचार विकल्पों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। इसमें स्किन प्रिक टेस्ट, सब्लिंगुअल इम्यूनोथेरेपी और बायोलॉजिक्स के उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्याख्यान दिए गए।
इसके साथ ही यूस्टेशियन ट्यूबोप्लास्टी, फ्लेक्सिबल लेरिंगोस्कोपी, फाइबरऑप्टिक एंडोस्कोपिक एग्जामिनेशन ऑफ स्वैलोइंग और सियालोएंडोस्कोपी जैसी आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीकों पर भी वैज्ञानिक जानकारी और उपचार संबंधी पहलुओं को साझा किया गया।
डॉक्टरों के लिए रिसर्च और सोशल मीडिया पर भी सत्र
कॉन्फ्रेंस के इंस्ट्रक्शनल कोर्स में थीसिस टॉपिक चुनने, प्रोटोकॉल लिखने, रिसर्च ग्रांट और पब्लिकेशन से संबंधित प्रशिक्षण शामिल किया गया। इसके साथ डॉक्टरों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर भी विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई।
‘डॉक्टरों के लिए सोशल मीडिया: वरदान या अभिशाप’ विषय पर विशेषज्ञों ने चिकित्सा क्षेत्र में सोशल मीडिया की उपयोगिता, इसके प्रभाव और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धियों, बीमारियों के निदान सहित अन्य जानकारियों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने के तरीकों पर भी मंथन किया गया।


















