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Forest Rights Act 2006: वनों पर पारंपरिक अधिकारों को मिली पहचान, बंजार में 172 सामुदायिक वन अधिकार स्वीकृत

Himachal Forest Rights Act Claim: कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल में 172 वन अधिकार समितियों को सामुदायिक अधिकार पत्र स्वीकृत हुए हैं। सहारा संस्था के 10 वर्षों के प्रयासों के बाद प्रशासन और पंचायतों के सहयोग से अब राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
Published on: 26 सितम्बर 2026
Forest Rights Act 2006: वनों पर पारंपरिक अधिकारों को मिली पहचान, बंजार में 172 सामुदायिक वन अधिकार स्वीकृत

Forest Rights Act 2006: वन अधिकार अधिनियम, 2006 को बंजार उपमंडल में धरातल पर लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपमंडल बंजार की कुल 238 वन अधिकार समितियों में से 172 समितियों के सामुदायिक वन अधिकार दावे स्वीकृत हो चुके हैं और उन्हें सामुदायिक अधिकार पत्र प्राप्त हो गए हैं। लंबे समय से इस दिशा में कार्य कर रही सहारा संस्था के दस वर्षों के प्रयासों के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

अब अगला चरण इन अधिकार पत्रों को संबंधित वन अधिकार समितियों को वितरित करने तथा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का है। सहारा संस्था के अनुसार इस संबंध में अंतिम सामूहिक निर्णय उपमंडल स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता उपमंडल अधिकारी बंजार करेंगे, और जिला स्तरीय समिति, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त कुल्लू करेंगे, के गठन के बाद लिया जाएगा। फिलहाल दोनों समितियों का गठन होना शेष है।

सहारा संस्था और उपमंडल अधिकारी बंजार के बीच अब तक हुए संवाद में भी अधिकार पत्रों के वितरण तथा आगे की प्रक्रिया को लेकर इसी व्यवस्था के अनुसार कार्य करने पर चर्चा हुई है।

दस साल से जारी प्रयासों का मिला परिणाम

सहारा संस्था के निदेशक राजेंद्र चौहान ने बताया कि संस्था पिछले करीब दस वर्षों से बंजार क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्रामीण समुदायों के साथ लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 172 समितियों को सामुदायिक वन अधिकार प्राप्त होना इस लंबे प्रयास की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वन अधिकार अधिनियम का उद्देश्य केवल वन भूमि से जुड़े अधिकार देना नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों पर निर्भर समुदायों के परंपरागत, सांस्कृतिक, सामाजिक और देव परंपराओं से जुड़े अधिकारों को भी कानूनी मान्यता प्रदान करना है।Forest Rights Act 2006: वनों पर पारंपरिक अधिकारों को मिली पहचान, बंजार में 172 सामुदायिक वन अधिकार स्वीकृत

करदार संघ की बैठक में भी दी गई कानून की जानकारी

गत दिनों देवसदन में आयोजित करदार संघ के महासम्मेलन में भी सहारा संस्था ने वन अधिकार अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लेकर विस्तार से जानकारी दी। करदारों को बताया गया कि स्थानीय समुदायों के पारंपरिक और देव परंपराओं से जुड़े अधिकारों को कानून के अंतर्गत किस प्रकार दर्ज करवाया जा सकता है।

संस्था ने सभी करदारों से आग्रह किया कि अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में वन अधिकारों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले पंचायत और वार्ड स्तर पर वन अधिकार समितियों का गठन सुनिश्चित करवाएं। इसके लिए पंचायत प्रधान और पंचायत सचिव से संपर्क कर आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।

पंचायतों को निभानी होगी अहम जिम्मेदारी

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में पंचायत स्तर की भूमिका महत्वपूर्ण है। वन अधिकार समितियों के गठन से लेकर ग्राम सभा की प्रक्रिया और वन अधिकारों से संबंधित दावों को तैयार करने तक पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी।

इसी उद्देश्य से सहारा संस्था बंजार विकास खंड में चल रहे पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान वन अधिकार अधिनियम पर विशेष प्रशिक्षण दे रही है। इन प्रशिक्षण सत्रों में पंचायत प्रधानों और उनकी पूरी टीम को अधिनियम के प्रावधानों, वन अधिकार समितियों के गठन, धारा 3(2) के अंतर्गत सामुदायिक अधिकारों तथा व्यक्तिगत वन अधिकारों से संबंधित दावों की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है।

प्रशासन के सहयोग से आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

वन अधिकार अधिनियम के मामलों का शीघ्र निपटारा करने के लिए सरकार की ओर से अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में कुल्लू जिले के बंजार उपमंडल में भी सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।

सहारा संस्था ने इस कार्य में सहयोग के लिए उपमंडल अधिकारी बंजार और खंड विकास अधिकारी बंजार सहित प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। संस्था का कहना है कि प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, देव समाज और स्थानीय ग्रामीणों के समन्वित प्रयासों से वन अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

बंजार उपमंडल की 172 वन अधिकार समितियों को सामुदायिक अधिकार प्राप्त होने पर सहारा संस्था और क्षेत्र के लोगों ने सभी संबंधित ग्रामीणों को शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही शेष समितियों के मामलों में भी नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई होने की उम्मीद जताई गई है।

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