CEC Gyanesh Kumar Controversy: लदाख के जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में लोकतांत्रिक जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में सुधार के उद्देश्य से किए जाने वाले किसी भी प्रयास के साथ वह हमेशा खड़े हैं।
चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए उन्होंने प्रक्रियात्मक सुधारों पर बल दिया। वांगचुक ने अतीत का उल्लेख करते हुए स्मरण कराया कि जब NEET UG पेपर लीक के दौरान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किए गए थे और उस समय सीजेपी एक कमजोर संगठन के रूप में कार्यरत थी, तब भी उन्होंने उसे अपना पूरा समर्थन दिया था।
उन्होंने कहा कि उस समय सीजेपी की स्थिति काफी सीमित थी, किंतु वर्तमान समय में संगठन के पास एक मजबूत और प्रखर आवाज है। उन्हें पूर्ण उम्मीद है कि यह बुलंद आवाज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त कमियों को झकझोरने में सफल सिद्ध होगी।
सीजेपी द्वारा 2 अक्टूबर को प्रस्तावित इस आंदोलन के दौरान अपनी उपस्थिति पर बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वह संभवतः व्यक्तिगत रूप से इस प्रदर्शन में मौजूद नहीं रहेंगे। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि उनका सैद्धांतिक समर्थन पूरी तरह से इस अभियान के साथ बना रहेगा। उनका दृष्टिकोण है कि सामाजिक और रणनीतिक आंदोलनों को अपने बल पर आगे बढ़ना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर होकर व्यापक बदलाव ला सकें।
अपनी अनुपस्थिति की वजह स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर अब समाज के विभिन्न वर्गों से कई लोग स्वतः ही सामने आ चुके हैं। जनता का इस प्रकार जागरूक होना और आंदोलन से जुड़ना अत्यंत उत्साहजनक है। इसी कारण उन्हें उम्मीद है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त से जुड़े इस विशिष्ट विषय पर अब व्यक्तिगत रूप से उनकी भौतिक उपस्थिति की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि आंदोलन स्वयं अपनी दिशा तय करने में सक्षम है।
चुनावी व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए वांगचुक ने कहा कि एक जीवंत और स्वस्थ लोकतांत्रिक देश के लिए पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया सबसे प्राथमिक और अनिवार्य आवश्यकता है। इस व्यवस्था में निरंतर सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश की बुनियादी चुनावी प्रक्रिया ही प्रभावित या संदेहास्पद हो जाएगी, तो फिर लोकतंत्र का वास्तविक अस्तित्व और उसकी साख ही समाप्त हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त, सोनम वांगचुक ने सरकारों द्वारा जनता से किए जाने वाले राजनीतिक वादों की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठी सरकारों को अपने द्वारा किए गए सभी वादों को अनिवार्य रूप से पूरा करना चाहिए। लद्दाख का उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि सरकार द्वारा लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था, जिसे समय पर पूरा किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उल्लेखनीय है कि दीपके के नेतृत्व में कॉकरोच जनता पार्टी ने आगामी 2 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। यह कदम चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर कथित असहमति और जारी विवादों के मद्देनजर उठाया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सीईसी अपना पद नहीं छोड़ते हैं, तो वह मुंबई से इस उग्र आंदोलन की शुरुआत करके इसे देश भर में फैलाएगी।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग से लगातार जवाबदेही की मांग की जा रही है। इस अभियान के तहत 2 अक्टूबर को मुंबई में पहला बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है। इस बीच, विभिन्न विपक्षी दल भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित विवादों और अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर हमलावर बने हुए हैं।


















