HRTC Nahan Depot: सिरमौर जिला के नाहन एचआरटीसी डिपो को मॉडल ई-डिपो में बदलने का देखा गया सपना पूरी तरह से बिखरता नजर आ रहा है। राज्य सरकार ने जुलाई माह में नाहन डिपो को पहली खेप के रूप में 15 इलेक्ट्रिक बसें सौंपी थीं। इसके पश्चात, 4 अगस्त को उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नाहन बस स्टैंड पर इन ई-बसों का विधिवत शुभारंभ किया था। 20 अगस्त तक डिपो को 10 और बसें मिलने के साथ ही जिले के बेड़े में कुल 25 नई इलेक्ट्रिकल बसें शामिल हो चुकी थीं।
हालांकि, इस शुरुआत के मात्र दो महीने के भीतर ही निगम प्रबंधन के उच्च अधिकारियों के एक फैसले ने पूरे जिले की परिवहन व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। जानकारी के मुताबिक परिवहन निगम के शीर्ष अधिकारियों ने बिना किसी ठोस योजना के नाहन डिपो से 10 इलेक्ट्रिकल बसों और 7 डीजल बसों को वापस मंगाकर प्रदेश के अन्य बस डिपो में स्थानांतरित कर दिया है।
अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली के कारण सिरमौर जिले में दो दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण बस रूट बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। सरकार और निगम प्रबंधन की यह प्रशासनिक विफलता अब स्थानीय जनता पर भारी पड़ रही है। स्थानांतरण के आंकड़ों के अनुसार, नाहन से हटाई गई 10 इलेक्ट्रिकल बसों को मुख्य रूप से तीन अलग-अलग डिपो में विभाजित किया गया है।
इनमें से रोहडू डिपो को 3 बसें, रामपुर डिपो को 2 बसें और पठानकोट डिपो को 5 इलेक्ट्रिकल बसें भेजी गई हैं। इसके अलावा, डिपो के बेड़े से निकाली गई 7 डीजल बसों को शिमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जिनमें नेरवा डिपो को 2, तारा देवी डिपो को 2, रोहडू डिपो को 2 और शिमला की लोकल यूनिट को 1 बस सौंपी गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, 1 और डीजल बस को शिमला लोकल यूनिट में भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने राज्य में चार ई-बस डिपो स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसके तहत नादौन, हरोली और ठियोग में नए डिपो बनाए गए, जबकि नाहन के एकमात्र पुराने डिपो को अपग्रेड कर ई-डिपो का दर्जा देने का निर्णय लिया गया था। पिछले 3 वर्षों से राज्य में इलेक्ट्रिक बसें लाने की कवायद जारी थी, लेकिन इस लंबी अवधि के बावजूद सरकार और परिवहन निगम सिरमौर जिले में बुनियादी ढांचा तक तैयार करने में नाकाम रहे।
जिले के अधिकांश इलाकों में चार्जिंग पॉइंट और बस स्टैंड भवनों का भारी अभाव है। यद्यपि पांवटा साहिब, नाहन, सराहां और राजगढ़ में निगम के अपने बस स्टैंड भवन उपलब्ध हैं, लेकिन संगडाह, शिलाई, श्रीरेणुकाजी, नौहराधार और हरिपुरधार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बस स्टैंड का कोई निर्माण ही नहीं हुआ है। इन स्थानों पर बसें खुली सड़कों पर ही रुकती और खड़ी होती हैं। तीन सालों के लंबे समय के बाद भी निगम केवल नाहन बस स्टैंड, वर्कशॉप और पांवटा साहिब बस स्टैंड पर ही चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने में सफल हो पाया है।
वहीं, क्षेत्रीय परिवहन का संकट आने वाले दिनों में और गहराने के आसार हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीन माह पहले ही नाहन डिपो की 10 बसें कंडम घोषित हो चुकी थीं और अक्टूबर माह के अंत तक 5 अन्य बसें भी कंडम हो जाएंगी। एक तरफ पुरानी बसें कबाड़ में तब्दील हो रही हैं, तो दूसरी तरफ 17 सक्रिय बसों को दूसरे डिपो में भेज दिया गया है। इस दोहरी मार से सिरमौर की जनता को दैनिक आवाजाही में भारी असुविधा भुगतनी पड़ रही है। इस मामले पर DDM रामदयाल ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों को ट्रायल के लिए शिमला भेजा गया है।”
उधर, इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नाहन के स्थानीय विधायक अजय सोलंकी ने स्पष्ट किया कि नाहन डिपो से 10 इलेक्ट्रिकल और 7 डीजल बसों को स्थानांतरित किए जाने के विषय पर राज्य के परिवहन मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से सीधी बातचीत की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सिरमौर के प्रभावित रूटों को बहाल करने के लिए सभी स्थानांतरित बसों को नाहन वापस मंगवाया जाएगा।


















