Cancer Treatment in India: स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार करते हुए भारत ने गंभीर बीमारियों के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जो अत्याधुनिक और जटिल तकनीक अभी तक केवल चुनिंदा विकसित देशों में ही उपलब्ध थी, उसका स्वदेशी संस्करण अब भारत में ही तैयार कर लिया गया है। यह जीवनरक्षक तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें उन्नत और महंगे इलाज की आवश्यकता होती है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए उपयोग में लाई जाने वाली इस विशेष तकनीक को ‘nexCar19’ नाम दिया गया है। वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत मरीज के शरीर से टी (T) सेल्स को निकाला जाता है, जिन्हें जेनेटिक रूप से रीप्रोग्राम किया जाता है। इसके पश्चात इन संशोधित कोशिकाओं को दोबारा मरीज के शरीर में भेजा जाता है ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को सटीकता से ढूंढकर नष्ट कर सकें।
इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उपचार को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। दुनिया भर में इस प्रकार के उपचार की लागत काफी अधिक यानी लगभग चार करोड़ रुपये तक बैठती है, जिसे भारत ने स्वदेशी अनुसंधान और तकनीक के माध्यम से घटाकर मात्र 40 लाख रुपये कर दिया है। यह क्रांतिकारी कदम देश के चिकित्सा इतिहास में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।
इस स्वदेशी थेरेपी के विकास में प्रमुख संस्थानों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसे आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया गया है। इसके बाद अक्टूबर 2023 में ‘nexCar19’ को भारतीय औषधि नियामक से आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त हुई, जिससे यह भारत की पहली स्वदेशी CAR-T सेल थेरेपी बन गई है।
इस चिकित्सा पद्धति के रोगों के निदान में परिणाम बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक रहे हैं। रिलैप्स या ट्रीटमेंट रेसिस्टेंट बी-सेल (B-cell) वाले कैंसर मरीजों में से लगभग 73 प्रतिशत रोगियों पर इस थेरेपी का एक गहरा और सकारात्मक प्रभाव देखा गया है, जो इसकी सफलता की पुष्टि करता है।
इस विशेष उपचार की प्रक्रिया के तहत देश भर के चुनिंदा और विशेषीकृत कैंसर उपचार केंद्रों से मरीज का रक्त मुंबई भेजा जाता है। इसके पश्चात लगभग एक महीने की समयावधि में यह उन्नत उपचार प्रक्रिया पूरी तरह से तैयार हो जाती है। हालांकि, यह एक अत्यधिक विशिष्ट थेरेपी है, इसलिए इसके कुछ चिकित्सीय दुष्प्रभाव भी सामने आते हैं, जिनमें इम्यूनोसप्रेशन जैसी स्थिति शामिल है।
इस बड़ी सफलता के बाद अब मुख्य विचार इस बात पर है कि इस उन्नत तकनीक की जानकारी और पहुंच को देश के प्रत्येक पात्र मरीज तक कैसे बढ़ाया जाए। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्वदेशी पहलों से देश के स्वास्थ्य ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन आ रहा है और आने वाले समय में जरूरतमंदों को कम खर्च पर विश्वस्तरीय उपचार मिल सकेगा।
NexCAR19: भारत की पहली स्वदेशी CAR T-cell थेरेपी का सफर
बता दें कि NexCAR19 तकनीक के विकास की शुरुआत वर्ष 2013 में आईआईटी बॉम्बे की लैब में प्रोफेसर राहुल पुरवार और उनकी टीम द्वारा किए गए शोध से हुई थी। इसे आगे बढ़ाने के लिए 2018 में संस्थान के इनक्यूबेशन सेंटर (SINE) में ‘इम्यूनोएक्ट’ (ImmunoACT) कंपनी की स्थापना की गई। इसके बाद, वर्ष 2021 में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के सहयोग से मरीजों पर इसका पहला क्लिनिकल ट्रायल शुरू हुआ।
अंततः, अक्टूबर 2023 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने इसे भारत की पहली स्वदेशी CAR T-cell थेरेपी के रूप में कमर्शियल इस्तेमाल की आधिकारिक मंजूरी दी। वर्तमान में (2026 तक), यह जीवनरक्षक तकनीक देश के कई प्रमुख अस्पतालों में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध है और अब तक सैकड़ों लोगों को दी जा चुकी है।



















