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UGC Act Shimla Protest: शिमला में UGC एक्ट के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा सचिवालय का गेट, पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज, मंत्री अनिरुद्ध का आंदोलन को खुला समर्थन

Shimla News: शिमला में यूजीसी एक्ट और स्वर्ण आयोग की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन के दौरान सचिवालय का गेट टूट गया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आंदोलन को खुला समर्थन दिया है।
UGC Act Shimla Protest: शिमला में UGC एक्ट के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने तोड़ा सचिवालय का गेट, पुलिस से झड़प और लाठीचार्ज, मंत्री अनिरुद्ध का आंदोलन को खुला समर्थन

UGC Act Shimla Protest: राजधानी शिमला में यूजीसी एक्ट और स्वर्ण आयोग के गठन की मांग को लेकर स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी और करणी सेना के बैनर तले सैकड़ों प्रदर्शनकारी राज्य सचिवालय के बाहर पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम यूजीसी एक्ट को तुरंत प्रभाव से रद्द करने और स्वर्ण आयोग के गठन की मांग कर रहा था। भारी संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पहले से ही चाक-चौबंद इंतजाम किए थे और सचिवालय के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया था।

हालाँकि, स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और हल्का लाठीचार्ज किया। पुलिस की इस कार्रवाई से गुस्साए प्रदर्शनकारी और अधिक उग्र हो गए तथा उन्होंने सचिवालय का गेट ही तोड़ डाला। इसके बाद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए और मुख्यमंत्री के पोस्टर फाड़ते हुए परिसर के अंदर तक घुस आए। हालांकि भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का कड़ा प्रयास किया, जिससे मौके पर भारी भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

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मंत्री अनिरुद्ध सिंह का स्वर्ण आंदोलन को खुला समर्थन
तनावपूर्ण माहौल के बीच कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने खुले मंच से स्वर्ण आंदोलन को अपना समर्थन देने का बड़ा ऐलान किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि चक्का जाम करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस द्वारा कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। मंत्री के इस ऐलान के बाद प्रदर्शनकारियों ने उनके पक्ष में जमकर नारेबाजी की और कुछ राहत महसूस की।

इसके साथ ही मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिस बल ने इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण स्थिति को बहुत ही संयम और समझदारी के साथ संभाला है। उन्होंने मीडिया और जनता के सामने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र के इस दौर में हर नागरिक को अपनी बात पूरी मजबूती से रखने और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को यह भी भरोसा दिलाया कि उनके प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक मुलाकात अगले दिन यानी शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ करवाई जाएगी।

स्वर्ण आयोग के गठन और यूजीसी एक्ट पर गरमाई सियासत
कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्वर्ण आयोग की मांग का समर्थन करते हुए एक बड़ा बयान दिया कि यदि समाज के अन्य विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए आयोग बनाए जा सकते हैं, तो स्वर्ण आयोग के गठन में भी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक मां अपने रोते हुए बच्चे की आवाज सुनकर उसे दूध पिलाती है, उसी प्रकार सरकार को भी अपने नागरिकों की जायज मांगों को पूरी गंभीरता से सुनना चाहिए।

वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रूमित ठाकुर ने आंदोलन को समर्थन देने के लिए कैबिनेट मंत्री अनिरुद्ध सिंह का खुले दिल से आभार जताया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अभी तक स्वर्ण आयोग का आधिकारिक गठन नहीं किया गया है और इसके लिए राज्य विधानसभा से विधिवत कानून पारित करवाया जाना बेहद जरूरी है। रूमित ठाकुर ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली आगामी बैठक में आंदोलन से जुड़े सभी अहम मुद्दों और मांगों को प्रमुखता से रखा जाएगा, जिससे सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी।

क्या है पूरा यूजीसी एक्ट विवाद?
विवाद के केंद्र में केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 2026 में लाया गया नया यूजीसी एक्ट है, जिसे देश भर के यूनिवर्सिटी और कॉलेज परिसरों में विद्यार्थियों के बीच किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों के खिलाफ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए कई सख्त नियम और प्रावधान तय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एक इक्विटी सेल और एक प्रभावी शिकायत निवारण समिति का गठन किया जाना अनिवार्य किया गया है।

इसी एक्ट को लेकर स्वर्ण समाज के युवाओं और विभिन्न संगठनों के बीच गहरा असंतोष व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों का यह तर्क है कि इस नए अधिनियम का भविष्य में दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता में भारी कमी आएगी और उनके अधिकारों का सीधा हनन होगा। इसी आशंका और विरोध के चलते यह पूरा मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जिस पर राज्य सरकार और प्रशासनिक स्तर पर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर जारी है।

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