Auto Sales Record FY26: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अपनी अब तक की सबसे शानदार उपलब्धि हासिल की है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस वित्तीय वर्ष में वाहनों की थोक बिक्री (wholesales) ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस ऐतिहासिक वृद्धि के पीछे सरकार के GST 2.0 सुधारों और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साल के दौरान रेपो रेट में की गई कई कटौतियों को मुख्य कारक माना जा रहा है।
SIAM की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल वाहनों की थोक बिक्री 10.4% बढ़कर 2,82,65,519 यूनिट तक पहुंच गई। जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष (FY25) में यह आंकड़ा 2,56,09,399 यूनिट था। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय ऑटो उद्योग ने अपना उच्चतम स्तर वित्त वर्ष 2018-19 (FY19) में दर्ज किया था, जिसे इस बार बड़े अंतर से पार कर लिया गया है।
पैसेंजर और टू-व्हीलर सेगमेंट में जबरदस्त उछाल
वाहन बाजार के सबसे महत्वपूर्ण पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में 7.9% की वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कुल 46,43,439 पैसेंजर वाहनों की बिक्री हुई, जो पिछले साल 43,01,848 यूनिट थी। मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रय शक्ति और ब्याज दरों में कमी ने लोगों को नई कारें खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है।
दोपहिया वाहनों के बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखी गई है। कुल टू-व्हीलर होलसेल बिक्री 10.7% की छलांग लगाकर 2,17,05,974 यूनिट रही, जो पिछले साल 1,96,07,332 थी। इस सेगमेंट के भीतर स्कूटरों की डिमांड में भारी इजाफा हुआ है, जो 18.5% बढ़कर 81,17,945 यूनिट तक पहुंच गई। वहीं, मोटरसाइकिल की बिक्री भी 6.6% की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,30,64,789 यूनिट दर्ज की गई।
कमर्शियल वाहन और एक्सपोर्ट का प्रदर्शन
आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर कमर्शियल व्हीकल्स पर भी दिखा। इनकी बिक्री 12.6% बढ़कर 10,79,871 यूनिट हो गई, जो पिछले वित्तीय वर्ष में 9,58,679 यूनिट थी। साथ ही, थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने भी 12.8% की स्वस्थ वृद्धि दिखाते हुए 8,36,231 यूनिट का आंकड़ा छुआ।
निर्यात (Exports) के मोर्चे पर भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की है। वित्त वर्ष 2026 में कुल वाहन निर्यात 24% की भारी वृद्धि के साथ 66,47,685 यूनिट रहा। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 53,62,884 यूनिट था। हालांकि, SIAM ने सावधान किया है कि मैक्सिको जैसे देशों में आयात शुल्क वृद्धि और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव भविष्य में निर्यात की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
आगामी वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए SIAM ने सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है। घरेलू मांग और मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचे के दम पर निरंतर वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, संस्था ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध अगर लंबा खिंचता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
SIAM के अनुसार, युद्ध की वजह से कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में उछाल, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और समुद्री शिपिंग मार्गों में बाधा आने की आशंका है। ये कारक उत्पादन लागत और सप्लाई चेन को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकते हैं, जिससे भविष्य की मांग पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, ऑटो जगत की नजरें वैश्विक हालातों और घरेलू बाजार की स्थिरता पर टिकी हैं।




















