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शिमला में किसान-बागवानों की आक्रोश रैली, सचिवालय के सामने की बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल तैनात

शिमला में किसान-बागवानों की आक्रोश रैली, सचिवालय के सामने की बैरिकेडिंग, भारी पुलिस बल तैनात
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शिमला ब्यूरो।
महंगे कार्टन और लागत बढ़ने से परेशान हिमाचल के बागवान आज यानी शुक्रवार को सचिवालय के घेराव के लिए शिमला पहुंचें है। बागवान संजौली से नवबहार होते हुए सचिवालय तक आक्रोष रैली निकाल रहे हैं। संयुक्त किसान मंच के बैनर तले प्रदेश के 27 किसान-बागवान संगठन इस आक्रोश रैली में शामिल हुए हैं। वहीँ किसान-बागवानों को समर्थन देने के लिए आम आदमी पार्टी किसान विंग और कांग्रेस के नेता भी पहुंच गए हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं भी आक्रोश रैली में पहुंची हैं। सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। डीजीपी संजय कुंडू मौके पर मौजूद हैं।

सेब बागवानों के सचिवालय के बाहर प्रदर्शन से पहले पुलिस बल तैनात कर छावनी बना दी गई है। पुलिस ने छोटा शिमला में सचिवालय के सामने बैरिकेडिंग कर सर्कुलर रोड बंद कर दिया है। बागवानों से निपटने को पुलिस बल और अग्निशमन के फायर टेंडर सचिवालय के दोनों गेट के पर लगा दिए हैं। संजौली की तरफ के गेट के पास ही पुलिस बल तैनात कर दिया है ताकि आंदोलनरत बागवानों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

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दरअसल, बागवानों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को 20 सूत्रीय मांग पत्र सौंप रखा है। इसमें से चार से पांच मांगे मान ली गई है लेकिन ज्यादातर मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

बता दें कि बागवानों की प्रमुख मांगे-
– कार्टन व ट्रे पर GST लौटने को लगाई जटिल शर्तें हटाने।
– कार्टन व ट्रे पर GST पूरी तरह खत्म करने।
– APMC को पूरी तरह लागू करने।
– APMC के शोघी बैरियर पर अवैध वसूली रोकने।
– कश्मीर की तर्ज पर MIS के तहत सेब की खरीद तीन ग्रेड में करने।
– MIS के तहत बागवानों की बकाया पेमेंट का भुगतान करने।
– सेब बेचने वाले दिन ही बागवानों को पेमेंट दिलाने।
– बेमौसम बर्फबारी और ओलावृष्टि से नुकसान का मुआवजा दिलाने।
– सेब पर आयात शुल्क सभी देशों के लिए 100 फीसदी करने।
– APMC की मंडियों की दुर्दशा सुधारने।
– मंडियों में लोडिंग-अनलोडिंग, स्टेशनरी व डाला के नाम पर लूट खत्म करने।

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संयुक्त किसान मंच का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की किसान-बागवान विरोधी नीतियों के कारण 5000 करोड़ रुपए से अधिक का सेब उद्योग संकट में आ गया है। बता दें कि इससे पहले बागवान ठियोग, रोहड़ू, नारकंडा, आनी, कोटखाई, चौपाल इत्यादि सेब बहुल क्षेत्रों में कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। बागवानों की इस हड़ताल का कांग्रेस, माकपा और आम आदमी पार्टी भी समर्थन कर रही है। इससे सत्तारूढ़ भाजपा बेकफुट पर आ गई है। गौरतलब है कि कृषि इनपुट पर उपदान खत्म करने, GST लगाने से खाद, बीज, दवाइयां, कृषि औजार और कार्टन की कीमते दो से तीन साल में दोगुना हो गई है,जबकि बागवानों को फसल का दाम आज भी 10 साल पहले वाला ही मिल रहा है। इससे सेब की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।

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