Aaj Ki Taza Khabar Himachal: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विधायकों के फोन न सुनने वाली अफसरों की मनमानी को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने सदन में मामला उठाते हुए कहा कि अधिकारी न जनता के काम के लिए फोन उठाते हैं, न बाद में कॉलबैक करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा जारी रहा तो धरना दिया जाएगा और अधिकारियों का टेलीफोन अलाउंस बंद करवाया जाना चाहिए।इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष दोनों ने समर्थन जताया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इसे बहुत गंभीर मामला बताते हुए कहा कि विधायक जनता के प्रतिनिधि हैं, इसलिए अफसरों को उनके फोन सुनना जरूरी है। उन्होंने विधायकों से ऐसे अधिकारियों के नाम लिखित में देने को कहा ताकि विधानसभा नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अध्यक्ष ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लेने की बात कही।
शिमला में पेंशनर्स का जोरदार धरना,बजट सत्र के दूसरे दिन सड़कों पर उतरे हजारों पेंशनर
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन शिमला में पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों पेंशनर सड़कों पर उतर आए। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी और कर्मचारी-पेंशनर विरोधी नीतियों का गंभीर आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन किया। समिति का कहना है कि 28 नवंबर 2025 को धर्मशाला के जोरावर स्टेडियम में निकाली गई विशाल रैली के बाद मुख्यमंत्री ने शिष्टमंडल को बातचीत का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई बैठक नहीं बुलाई गई। पेंशनरों ने आरोप लगाया कि वित्तीय संकट का हवाला देकर सरकार उनके महंगाई भत्ते, लंबित एरियर और अन्य लाभ रोक रही है, जबकि विधायकों-जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों और आयोग पदाधिकारियों की पेंशन में बढ़ोतरी की जा रही है।
उनकी मुख्य मांगे
– 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट, कम्यूटेशन और संशोधित पेंशन का भुगतान
– 13 प्रतिशत महंगाई भत्ता और लंबित एरियर की तत्काल अदायगी
– विभिन्न बोर्ड-निगमों, परिवहन निगम, विद्युत बोर्ड, विश्वविद्यालयों और अन्य विभागों के पेंशनरों को समय पर भुगतान
समिति के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि शिष्टमंडल को जल्द वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया, तो बजट पेश होने वाले दिन हजारों पेंशनर विधानसभा के बाहर उग्र प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि पेंशनर अपने हक के लिए आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और अगला प्रदर्शन पहले से भी बड़ा होगा।उन्होंने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ वित्तीय संकट का रोना रोया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकारी विभागों में करोड़ों की गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। पेंशनर ऐसी नीति को बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा के बाहर शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील की।













