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हिमाचल में कांग्रेस ने महज 37,974 वोट ज्यादा पाकर भाजपा को सत्ता से किया बेदखल

हिमाचल में कांग्रेस ने महज 37,974 वोट ज्यादा पाकर भाजपा को सत्ता से किया बेदखल

प्रजासत्ता ब्यूरो।
हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल में सरकार बदलने का सिलसिला इस बार में जारी रहा। पांच साल से सत्ता में बैठी भाजपा को 25 और कांग्रेस को 40 सीटें मिली हैं। अन्य को 3 सीट मिली हैं। वहीं अगर इस विधानसभा चुनाव में दोनो दलों को मिले मतों का अंतर देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने महज 37,974 वोट ज्यादा पाकर भारतीय जनता पार्टी को न सिर्फ सत्ता से बेदखल किया, बल्कि उसके ‘रिवाज’ बदलने के सपने पर भी पानी फेर दिया।

कांग्रेस ने 43.9 फीसदी वोट शेयर हासिल कर 40 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 43 फीसदी वोट शेयर के बल पर 25 सीटें जीतने में कामयाब रही। कांग्रेस बीजेपी के वोट शेयर का अंतर केवल 0.9 प्रतिशत रहा, जो 1951 के बाद सबसे कम है। यही नहीं, 40 विधायक लाने वाली कांग्रेस को कुल 18,52,504 वोट मिले, जबकि 18,14,530 वोटों के बल पर केसरिया पार्टी अपने 25 उम्मीदवारों को ही विधायक बना सकी।

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गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 48.79 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 44 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 21 सीटें मिली थीं। दोनों दलों के वोट शेयर में 7.11 प्रतिशत का अंतर था।

उल्लेखनीय है कि राज्य में अब तक 1951 से 2022 तक 14 विधानसभा चुनाव हुए हैं इस दौरान 1972 के विधानसभा चुनावों में विजेता दूसरे नंबर पर आई पार्टी के बीच अधिकतम अंतर 45.49 प्रतिशत रहा था जबकि 2022 के चुनावों में विजेता और उपविजेता राजनीतिक दलों के वोट शेयर में अंतर 1951 के बाद से सबसे निचले स्तर 0.9 प्रतिशत रहा है।

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बता दें कि इस चुनाव में भाजपा के सभी कैबिनेट मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी। नतीजों में साफ देखा जा सकता है कि जयराम सरकार के मंत्रियों की हालत खराब रही। जयराम मंत्रिमंडल के 10 मंत्रियों में से केवल दो मंत्री जिसमे परिवहन एंव उद्योग मंत्री रहे बिक्रम सिंह, तथा ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ही अपनी लाज बचा पाए। जबकि कसुम्पटी सीट से चुनाव लड़ रहे और हिमाचल की राजनीति का एक बड़ा चेहरा और सूबे की सियासत की बखूबी समझ रखने वाले सुरेश भारद्वाज भी हार गए। इसके अलावा मनाली सीट से शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, शाहपुर सीट से सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता मंत्री सरवीन चौधरी, लाहौल स्पीति सीट से तकनीकी शिक्षा मंत्री रामलाल मारकंडा, कुटलैहड़ सीट से पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर, कसौली सीट से स्वास्थ्य मंत्री राजीव सैजल, फतेहपुर से वन मंत्री राकेश पठानिया और घुमारवीं सीट से खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेंद्र गर्ग हार गए।

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