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हिमाचल में फीमेल हेल्थ वर्कर्स ने प्रदेश सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

हिमाचल प्रदेश फीमेल हेल्थ वर्कर्स संघ की अध्यक्ष सुर्दशना कुमारी ने कहा कि सरकार भर्तियों में जीएनएम और बीएससी नर्सिंग को भर्ती में तरजीह दी जा रही है, जबकि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। पिछले काफी समय से प्रदेश सरकार ने नियमों की अनदेखी कर जीएनएम और बीएससी नर्सिंग की छात्राओं को नौकरी में मौका दिया है, जबकि उन्हें न तो प्रमोशन दी जा रही है और न ही सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती के लिए कोटा दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश फीमेल हेल्थ वर्कर्स संघ का आरोप है कि एएनएम वर्कर्स ने कोविड काल में घर-घर जाकर वैक्सीनेशन करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन एएनएम वर्कर्स को न तो उतना वेतन मिल पा रहा है और न ही नौकरी में तरजीह दी जा रही है। जबकि नौकरी के लिए भी अब सरकार द्वारा आरएंडपी नियमों में भी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर कई बार स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार हमारी ओर बिलकुल ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में सिर्फ आंदोलन करने के का रास्ता ही बचा है। जब तक सरकार डिप्लोमा प्राप्त एएनएम को नौकरी में तरजीह नहीं देती है, तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। अगर सरकार हमारी मांगे नहीं मानती है, तो मजबूरन हमें आमरण अनशन पर जाना पड़ेगा।

शिमला|
हिमाचल फीमेल हेल्थ वर्कर्स ने प्रदेश सरकार के भर्ती और पदोन्नति नियमों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश भर से आई एएनएम फीमेल हेल्थ वर्कर्स ने दोपहर बाद पंचायत भवन से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। इस दौरान सरकार हेल्थ वर्कर्स ने खिलाफ नारेबाजी की। प्रदेश के कोने-कोने से आई हेल्थ वर्कर्स DC ऑफिस के बाहर अनशन पर बैठ गई हैं। ANM फीमेल हेल्थ वर्कर्स संघ ने सरकार पर R&D नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

हिमाचल प्रदेश फीमेल हेल्थ वर्कर्स संघ की अध्यक्ष सुर्दशना कुमारी ने कहा कि सरकार भर्तियों में जीएनएम और बीएससी नर्सिंग को भर्ती में तरजीह दी जा रही है, जबकि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। पिछले काफी समय से प्रदेश सरकार ने नियमों की अनदेखी कर जीएनएम और बीएससी नर्सिंग की छात्राओं को नौकरी में मौका दिया है, जबकि उन्हें न तो प्रमोशन दी जा रही है और न ही सरकारी नौकरी में सीधी भर्ती के लिए कोटा दिया जा रहा है।

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हिमाचल प्रदेश फीमेल हेल्थ वर्कर्स संघ का आरोप है कि एएनएम वर्कर्स ने कोविड काल में घर-घर जाकर वैक्सीनेशन करने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन एएनएम वर्कर्स को न तो उतना वेतन मिल पा रहा है और न ही नौकरी में तरजीह दी जा रही है। जबकि नौकरी के लिए भी अब सरकार द्वारा आरएंडपी नियमों में भी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर कई बार स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन प्रदेश सरकार हमारी ओर बिलकुल ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में सिर्फ आंदोलन करने के का रास्ता ही बचा है। जब तक सरकार डिप्लोमा प्राप्त एएनएम को नौकरी में तरजीह नहीं देती है, तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। अगर सरकार हमारी मांगे नहीं मानती है, तो मजबूरन हमें आमरण अनशन पर जाना पड़ेगा।

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