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Himachal Ambulance Strike: हिमाचल में हड़ताल पर जाएंगे 108 और 102 एंबुलेंस सेवा कर्मचारी, आपात सेवाओं पर खतरा

Himachal Ambulance Service Workers Strike: हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज होकर प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन के अनुसार हड़ताल 12 फरवरी से 17 फरवरी तक चलेगी। मांगें न मानी गईं तो आपात स्वास्थ्य
Himachal Ambulance Strike: हिमाचल में हड़ताल पर जाएंगे 108 और 102 एंबुलेंस सेवा कर्मचारी
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Himachal Ambulance Strike: हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की अहम कड़ी मानी जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं पर एक बार फिर संकट गहराता नजर आ रहा है। प्रदेश सरकार की ओर लंबे समय से लंबित मांगों की सुनवाई न होने से नाराज एंबुलेंस कर्मचारियों ने प्रदेशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दे दी है। इससे राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

एंबुलेंस यूनियन मंडी के जिला प्रधान सुमित कपूर और महासचिव पंकज कुमार ने बताया कि हड़ताल 12 फरवरी की सुबह आठ बजे से शुरू होकर 17 फरवरी की सुबह आठ बजे तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि से पहले सरकार और प्रबंधन ने उनकी मांगों को नहीं माना, तो प्रदेशभर में आपात सेवाएं पूरी तरह बाधित हो सकती हैं। ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित प्रबंधन कंपनी की होगी।

गौरतलब है कि यूनियन ने अपनी मुख्य मांगों को भी स्पष्ट किया है। इनमें हाई कोर्ट और लेबर कोर्ट द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन को तुरंत लागू करना प्रमुख है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने 12 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि आठ घंटे के बाद किए गए अतिरिक्त काम के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान दिया जाए।

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इसके अलावा कर्मचारियों की सबसे अहम मांग ठेका प्रथा को खत्म कर एक स्थायी राजकीय नीति बनाने की भी है, ताकि उन्हें सुरक्षित भविष्य मिल सके। इसके अलावा, हड़ताल के चलते पहले निकाले गए कर्मचारियों की तुरंत बहाली, वेतन में हर साल 10 प्रतिशत अनिवार्य बढ़ोतरी, पीएफ, ग्रेच्युटी और छुट्टियों के उचित प्रावधान की मांग भी उठाई गई है।

यूनियन नेताओं ने कहा कि जो कंपनियां श्रम कानूनों और अदालतों के आदेशों की अनदेखी कर रही हैं, उन्हें टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि इस आंदोलन को केवल कर्मचारियों की लड़ाई न समझें, बल्कि इसे बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़कर देखें। उनका कहना है कि जब तक कर्मचारियों का शोषण बंद नहीं होगा, तब तक सेवाएं सुचारू रूप से नहीं चल पाएंगी।

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