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Plastic Waste Roads: हिमाचल में प्लास्टिक कैरी बैग और दूध के पाउच से बनेंगी सड़कें, सुक्खू सरकार में हुआ बड़ा फैसला

Plastic Waste Roads Construction: हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए कैरी बैग और दूध के पाउच जैसे अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग सड़क निर्माण में करने के लिए नई एसओपी जारी की है।
Published on: 5 June 2026
Plastic Waste Roads: हिमाचल में प्लास्टिक कैरी बैग और दूध के पाउच से बनेंगी सड़कें, सुक्खू सरकार में हुआ बड़ा फैसला

Plastic Waste Roads Himachal: हिमाचल प्रदेश लंबे समय से प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार की पहल करता रहा है। इसी दिशा में अब राज्य सरकार द्वारा एक और अनूठा कदम उठाया गया है। प्रदेश में कैरी बैग, दूध के पाउच और अन्य प्लास्टिक अपशिष्ट अब केवल कूड़े के ढेर का हिस्सा बनकर नहीं रह जाएंगे, बल्कि इन्हें सड़कों की मजबूती का आधार बनाया जाएगा।

राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने बिटुमिन सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसके लिए विभाग की ओर से एक नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ सड़क निर्माण को बढ़ावा देना है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश में अब कैरी बैग, दूध के पाउच और अन्य इस्तेमाल हो चुके प्लास्टिक से सड़कें बनाई जाएंगी।

लोक निर्माण विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में निर्धारित मानकों के अनुसार प्रसंस्कृत प्लास्टिक कचरे का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा। विभाग का स्पष्ट मानना है कि इस वैज्ञानिक पद्धति से प्लास्टिक अपशिष्ट के निस्तारण की गंभीर समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके साथ ही सड़कों की गुणवत्ता और उनके टिकाऊपन में भी पहले से काफी सुधार आएगा, जो बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव देवेश कुमार की ओर से इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस नई व्यवस्था के मुताबिक, हर पीडब्ल्यूडी मंडल अपने अधिकार क्षेत्र में वित्तीय वर्ष के दौरान सड़क निर्माण के लिए आवश्यक स्वच्छ प्लास्टिक कचरे की मात्रा का आकलन करेगा। इस निर्धारित मात्रा को लेकर संबंधित शहरी निकायों को लिखित रूप से सूचित किया जाएगा। इसके बाद, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी 15 दिनों के भीतर संबंधित नगर निकायों का दौरा करेंगे। वहां वे स्थानीय कर्मचारियों को प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से एकत्रित करने और उसे अलग करने का विशेष प्रशिक्षण देंगे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लोक निर्माण विभाग के सचिव देवेश कुमार ने बताया कि सड़क निर्माण में कैरी बैग, प्लास्टिक बोरे, दूध की थैलियां और कॉस्मेटिक एवं डिटर्जेंट की प्लास्टिक बोतलों से प्राप्त होने वाले लचीले प्लास्टिक कचरे का ही उपयोग किया जाएगा। इसके विपरीत, कठोर प्लास्टिक और काले रंग की प्लास्टिक फिल्म या सामग्री का उपयोग करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

नगर निकायों को इस प्लास्टिक कचरे को पूरी तरह साफ करके तैयार करना होगा। इसमें यह ध्यान रखना अनिवार्य होगा कि धूल या अन्य अशुद्धियां प्लास्टिक के कुल वजन के एक प्रतिशत से अधिक न हों। इसके बाद प्लास्टिक को 2.36 मिलीमीटर से 600 माइक्रोन आकार तक बारीक काटकर (श्रेड करके) तैयार किया जाएगा। निर्धारित आकार से बड़े टुकड़ों को विभाग द्वारा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जारी की गई एसओपी के मुताबिक, विभिन्न श्रेणियों की सड़कों की सतही परत में प्रयुक्त होने वाले बिटुमिनस मिश्रण को तैयार करते समय बिटुमन के वजन का आठ प्रतिशत श्रेड किया गया प्लास्टिक मिलाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रदेश के सभी पीडब्ल्यूडी कार्यकारी अभियंताओं को हर महीने एक विस्तृत रिपोर्ट भेजनी होगी।

इस रिपोर्ट में नगर निकायों से प्राप्त प्लास्टिक कचरे की कुल मात्रा और उससे निर्मित सड़कों की लंबाई एवं पूरा विवरण शामिल करना अनिवार्य होगा। मुख्य अभियंताओं के माध्यम से इस रिपोर्ट को शहरी विकास विभाग, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नियमित रूप से भेजा जाएगा।

नगर निकायों से पूरी तरह तैयार और श्रेड किया गया प्लास्टिक संबंधित पीडब्ल्यूडी कार्यकारी अभियंता द्वारा उठाया जाएगा। यदि किसी स्थान पर प्लास्टिक कचरा निर्धारित आकार से बड़ा पाया जाता है, तो पीडब्ल्यूडी अपने स्तर पर उपलब्ध श्रेडर का उपयोग कर उसे पुनः निर्धारित आकार में तैयार करेगा।

जब नगर निकाय आवश्यक मात्रा में प्लास्टिक कचरा तैयार कर लेंगे, तो इसकी सूचना तत्काल पीडब्ल्यूडी को देंगे। इसके बाद संबंधित कार्यकारी अभियंता और नगर निकाय के अधिकारी मौके पर जाकर संयुक्त निरीक्षण करेंगे। इस संयुक्त निरीक्षण की रिपोर्ट मुख्य अभियंताओं, शहरी विकास विभाग, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग और हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी जाएगी।

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