Himachal Assembly Monsoon Session: हिमाचल प्रदेश चौदहवीं विधानसभा का 12वां मानसून सत्र आज (शुक्रवार, 21 अगस्त) से शुरू हो गया है। 3 सितंबर तक चलने वाले इस मानसून सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें आयोजित की जानी हैं। सत्र में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए विधायकों की ओर से कुल 1036 सवाल भेजे गए हैं। इससे पूर्व, सत्र की पहली बैठक की शुरुआत सुबह 11 बजे निर्धारित की गई थी।
नियमों के अनुसार, पहले दिन दिवंगत पूर्व विधायक विजेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के निधन पर शोकोद्गार व्यक्त किया जाना था, जिसके बाद सदन की नियमित कार्यवाही शुरू होनी थी। सत्र की औपचारिक शुरुआत से पहले हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सत्र को सार्थक एवं उत्पादक बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील भी की थी। हालांकि, सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

राष्ट्रगीत का मुद्दा हिमाचल विधानसभा तक पहुंच गया और सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही महज 12 मिनट ही चल सकी। सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही राष्ट्रगीत के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायक एवं मंत्री भी अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। सदन में दोनों तरफ से जोरदार हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही को कल (शनिवार, 22 अगस्त) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन के अंदर हंगामे से पहले, कार्यवाही शुरू होने से पूर्व ही विपक्ष के विधायकों ने परिसर में युवाओं को रोजगार न मुहैया करवाने के मुद्दे पर राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के साथ किए गए वादों को पूरा न करने का गंभीर आरोप लगाया। इसके साथ ही विपक्ष ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देकर रोजगार के मुद्दे पर तुरंत चर्चा करवाने की मांग उठाई है।
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल प्रदेश में 5 लाख नौकरियां देने का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन अब तक प्रदेश के युवाओं को केवल कुछ हजार नौकरियां ही दी जा सकी हैं। रणधीर शर्मा ने सरकार पर बेरोजगार युवाओं के साथ ठगी और धोखा करने का आरोप लगाते हुए मांग की कि सदन के सारे काम स्थगित कर सबसे पहले युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर चर्चा करवाई जाए।
दूसरी ओर, विपक्ष के इन आरोपों और प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पलटवार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करना अच्छी बात है और विरोध जताना विपक्ष का दायित्व है, लेकिन भाजपा विधायक अपनी आंतरिक कलह के चलते यह प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता केवल दिखावे के लिए और पार्टी हाईकमान की नजरों में बने रहने के लिए विरोध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि भाजपा के विधायक नेता प्रतिपक्ष को उनके पद से हटाना चाहते हैं। इस तरह मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी सियासी तकरार देखने को मिली।


















