Himachal Paneer Ban News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य भर में एनालॉग यानी कृत्रिम और नॉन-डेयरी पनीर की बिक्री, भंडारण तथा इस्तेमाल पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन निदेशालय की ओर से आईएएस अधिकारी आशीष सिंघमार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। इस आदेश के तहत अब राज्य में किसी भी प्रकार के ऐसे उत्पाद को पनीर के नाम से नहीं बेचा जा सकेगा, जिसमें दूध की वसा, मिल्क सॉलिड या दूध से मिलने वाले प्राकृतिक घटकों की जगह पूरी तरह या आंशिक रूप से वनस्पति तेल, वसा अथवा अन्य गैर-डेयरी सामग्रियों का उपयोग किया गया हो।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि शाकाहारी आबादी के लिए पनीर प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है। ऐसे में एनालॉग पनीर के नाम पर जनता के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह आदेश होटल, रेस्तरां, ढाबों, हॉस्टल की मेस और कैटरिंग कारोबार से जुड़े सभी व्यक्तियों तथा संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा।

इन सभी खाद्य प्रतिष्ठानों को पनीर के नाम पर केवल वही उत्पाद इस्तेमाल करना होगा जो निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता हो। यदि कोई भी एजेंसी या कारोबारी एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर को असली पनीर के रूप में तैयार करता, रखता, परोसता या बेचता हुआ पाया जाता है, तो संबंधित सरकारी एजेंसियां उस पर कानूनी शिकंजा कसेंगी।
खाद्य सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिसूचना में पैकेज्ड पनीर बेचने वाले कारोबारियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। पैक्ड पनीर बेचने वाले खाद्य कारोबारियों को पैकेट के लेबल पर उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसकी सटीक संरचना से जुड़ी सभी अनिवार्य घोषणाएं करनी होंगी। इसके अलावा, सभी कारोबारियों को पनीर की खरीद का बिल, इनवॉइस, बैच नंबर और पैकेजिंग से संबंधित पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान पनीर की ट्रेसबिलिटी यानी स्रोत की जांच को सुनिश्चित करना है।
यदि जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को किसी उत्पाद पर संदेह होता है, तो वे उसका सैंपल लेने और कानून के मुताबिक आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। प्रयोगशाला परीक्षण में यदि पनीर का सैंपल निर्धारित मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो संबंधित सामग्री को जब्त करने, बाजार से वापस मंगाने (रिकॉल), निपटाने या नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
दोषी पाए जाने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत सब-स्टैंडर्ड, मिसब्रांडेड या असुरक्षित खाद्य सामग्री बेचने के आरोप में मामला दर्ज किया जाएगा और दंडात्मक कार्रवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि एनालॉग या कृत्रिम पनीर का निर्माण बहुत कम दूध का उपयोग करके और मुख्य रूप से सिंथेटिक तरीकों से किया जाता है। इसे तैयार करने में सस्ते वनस्पति तेलों और वसा का प्रयोग होता है, लेकिन दिखने में यह बिल्कुल असली डेयरी पनीर जैसा ही लगता है। इसके विपरीत, असली पनीर गाय या भैंस के शुद्ध दूध से तैयार किया जाता है।
लागत कम होने के कारण एनालॉग पनीर बाजार में असली पनीर की तुलना में काफी सस्ता मिलता है, जिसकी वजह से कई रेस्तरां, ढाबे और कैटरिंग व्यवसायी अधिक मुनाफे के चक्कर में इसे सस्ते विकल्प के रूप में चुनते हैं। यह एनालॉग पनीर सेहत के लिए अत्यंत हानिकारक साबित होता है। सरकार का यह नया आदेश पूरे हिमाचल प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।


















