Himachal RDG Controversy: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) का मुद्दा गरमा हुआ है। मंगलवार को दूसरे दिन भी सदन में तीखी बहस हुई। सदन के बाहर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भाजपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने भारत के संविधान की प्रति हाथ में दिखाते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने दूरदर्शिता दिखाते हुए राज्यों को उनके अधिकार दिए थे।
उन्होंने कहा कि संविधान में साफ लिखा है कि कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से धन कैसे बांटा जाएगा। देश के नेताओं ने उस समय ही इन सवालों का जवाब दे दिया था। उप-मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों से राज्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पूछा कि अगर राज्यों को मजबूत नहीं करना था तो उनका गठन ही क्यों किया गया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के बनते समय यह तय था कि इस पर्वतीय राज्य को केंद्र से मदद मिलेगी। RDG को भारत के कंसोलिडेटेड फंड से जोड़ा गया था। लेकिन अब जीएसटी व्यवस्था से बड़े राज्यों को ज्यादा फायदा हुआ, जबकि हिमाचल जैसे छोटे और विशेष श्रेणी के राज्यों को आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले जीएसटी मुआवजा बंद किया गया और अब RDG को भी खत्म करने की बात हो रही है। यह हिमाचल के लिए बहुत गंभीर मामला है।
मुकेश अग्निहोत्री ने आंकड़े देते हुए बताया कि 17 राज्यों में से 12 राज्यों की RDG पर निर्भरता सिर्फ 1 प्रतिशत के आसपास है। उन्हें इसकी ज्यादा जरूरत नहीं है। लेकिन हिमाचल की निर्भरता 13 प्रतिशत है। नागालैंड की 17 प्रतिशत है, जबकि कर्नाटक की सिर्फ 1 प्रतिशत। पूर्व जयराम ठाकुर सरकार को 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे से और 54 हजार करोड़ रुपये RDG से मिले थे।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि RDG सिर्फ पैसे का सवाल नहीं है, बल्कि यह हिमाचल और हिमाचलियत की पहचान का मामला है। जिन लोगों ने पहले ‘स्टेट हुड मारो ठूड’ जैसे नारे लगाए थे, वही आज RDG का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने जयराम ठाकुर के बयान का भी जिक्र किया कि RDG बंद होने पर वे चुनाव के लिए तैयार रहेंगे। मुख्यमंत्री का साफ संदेश था कि RDG हिमाचल के लिए बहुत जरूरी है। इसे बंद करना प्रदेश के साथ धोखा होगा।














