HRTC CAG Report: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बही-खातों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और लेखांकन की गड़बड़ियों का पर्दाफाश हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने वर्ष 2021-22 के लिए निगम के वित्तीय लेखों की ऑडिट जांच के बाद जारी अपनी रिपोर्ट में यात्री आय, हिमाचल विशेष सड़क कर, वर्तमान देनदारियों और कर्मचारियों के संशोधित वेतनमान के प्रावधानों में गंभीर खामियों पर सवाल खड़े किए हैं।
563.10 करोड़ रुपये की देनदारी का कोई हिसाब नहीं
कैग की रिपोर्ट में सबसे गंभीर मामला कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतनमान संशोधन से जुड़ी देनदारी का सामने आया है। निगम की सेवा समिति ने 23 अप्रैल 2022 को अपने कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान वेतनमान लागू करने का फैसला किया था। इसके बाद 18 जून 2022 को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 151वीं बैठक में भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतनमान व पेंशन संशोधन को हरी झंडी दे दी गई थी।

इसके तहत 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान लागू होने के कारण निगम पर करीब 563.10 करोड़ रुपये की अनुमानित देनदारी बनती थी। हालांकि, निगम प्रबंधन ने अपने वित्तीय लेखों में इस भारी-भरकम राशि के लिए कोई प्रावधान ही नहीं किया और इस देनदारी को पूरी तरह छिपा लिया।
यात्री दुर्घटना बीमा कोष का पैसा आय में जोड़ा
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, निगम के निदेशकों ने जनवरी 2010 में ‘यात्री दुर्घटना बीमा कोष’ बनाने और इसके लिए अलग बैंक खाता रखने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद, यात्रियों से बीमा के रूप में वसूले गए 1.72 करोड़ रुपये को अलग फंड में डालने के बजाय सीधे ‘यात्री आय’ में जोड़ दिया गया, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
विशेष सड़क कर में गलत प्रविष्टियां, घाटा दिखाया कम
विशेष सड़क कर (SRT) के लेखांकन में भी कैग ने गंभीर त्रुटियां पकड़ी हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2020-21 के दौरान स्टेज कैरिज पर इस कर में 100 प्रतिशत की छूट दी थी। इसके बावजूद मंडी क्षेत्रीय कार्यालय ने वर्ष 2020-21 में 39.66 लाख रुपये की देनदारी दिखा दी।
अगले वित्त वर्ष (2021-22) में इस गलती को सुधारने (रिवर्स करने) के बजाय, निगम ने विशेष सड़क कर के मद में 7,032 लाख (70.32 करोड़) रुपये की देनदारी खड़ी कर दी और उतनी ही राशि संबंधित खाते में क्रेडिट दर्ज कर दी। गलत अकाउंटिंग की इस प्रक्रिया से यात्री आय, वर्तमान परिसंपत्तियों और देनदारियों को 39.66 लाख रुपये से बढ़ाकर दिखाया गया, जिससे निगम का वास्तविक घाटा भी 39.66 लाख रुपये कम नजर आया।
क्षेत्रीय कार्यालयों में लापरवाही, देनदारियां घटाकर दिखाईं
निगम की वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करते हुए कैग ने पाया कि वर्तमान देनदारियों में ‘यात्री एवं माल कर’ और ‘विशेष सड़क कर’ की 24.15 करोड़ रुपये की देनदारी को कम करके आंका गया था। चंबा और तारादेवी क्षेत्रीय कार्यालयों में विशेष सड़क कर के लिए क्रमशः 3.23 करोड़ रुपये और 20.92 करोड़ रुपये के कम प्रावधान किए गए। इस गलत प्रविष्टि से एक तरफ निगम की देनदारियां कम दिखीं, वहीं दूसरी तरफ इसके वित्तीय घाटे को 24.15 करोड़ रुपये अधिक करके पेश किया गया।
















