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कांग्रेस में हॉलीलॉज बन रहा फिर पावर सेंटर, लंच के बहाने प्रतिभा और विक्रमादित्य का शक्ति प्रदर्शन

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प्रजासत्ता।
मंडी लोकसभा सीट से चुनाव जीतने के बाद प्रतिभा सिंह ने शिमला हॉली लॉज में सभी विधायकों व पूर्व विधायकों के लिए लंच का आयोजन किया।लंच में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री सहित सभी विधायक शामिल हुए।लंच में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर, आशा कुमारी, सुखविंदर सिंह सुखु, रामलाल ठाकुर पूर्व ,ठाकुर सिंह भरमौरी, प्रदेश कांग्रस उपाध्यक्ष एव लाहौल स्पिति पूर्व विधायक रवि ठाकुर ,चंद्र कुमार सहित अन्य नेता मौजूद रहे। लंच के बाद सभी कांग्रेस नेताओं ने किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा से इंकार किया और एकजुटता की बात कही। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक सुखविंदर सिंह सुखू ने भी कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और 2022 में भी यही एकजुटता रहेंगी लेकिन पार्टी में कुछ जरूरी फैंसले लेनी की जरूरत है

उल्लेखनीय है कि हिमाचल में चार सीटों पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के बाद कांग्रेस नेता उत्साहित है। वहीं मंडी में प्रतिभा सिंह की जीत और 17 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन से एक सवाल निकल कर सामने आ रहा है कि क्या हिमाचल कांग्रेस में अब नया पॉवर सेंटर हॉली लॉज होगा। कांग्रेस में यह परंपरा रही है कि सामान्य कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी पदाधिकारी एक बड़ी छतरी के नीचे एक जुट हो जाते हैं। पांच दशक तक कांग्रेस के पास वीरभद्र सिंह के रूप में विशालकाय राजनीतिक छाता था अब प्रतिभा सिंह की चुनावी जीत में जिस तरह से विक्रमादित्य ने ग्राउंड वर्क किया है उससे हॉली लॉज की अहमियत एक बार फिर साबित हुई है। वीरवार को जिस तरह से कांग्रेस के सभी नेता हॉली लॉज पहुंचे हैं उससे ये संकेत नजर आ रहे हैं कि 2022 में भी हॉली लॉज ही पावर सेंटर साबित होगा।

जिस तरह पार्टी बढ़ रही है। लंच के बहाने कहीं न कहीं सांसद प्रतिभा सिंह और विक्रमादित्य सिंह ने वीरभद्र सिंह के बिना भी हॉली लॉज की बादशाहत बरकरार रखने के लिए शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की है। हालांकि लंच में कांगड़ा से वरिष्ठ नेत्री विप्लव ठाकुर और वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाने वाले हर्ष महाजन नजर नहीं आए।

वहीं इस लंच में विक्रमादित्य सिंह और प्रतिभा सिंह ने गर्मजोशी से सबका स्वागत किया और एकजूटता का संदेश देने की कोशिश की । हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री के रहते इस तरह के आयोजन यहां होते रहते थे. लेकिन ये पहला मौका है कि जब उनकी गैर मौजूदगी में सभी यहां एकत्रित हुए। जिससे सभी को यह संदेश जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बाद उनकी विरासत को विक्रमादित्य संभालते नजर आएंगे।

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