Kinnar Kailash Yatra High Court Order: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने किन्नौर जिले की पोवारी पंचायत द्वारा प्रसिद्ध और सालाना आयोजित होने वाली किन्नर कैलाश यात्रा पर लगाए गए स्थायी प्रतिबंध को रद कर दिया है। अदालत के इस अहम आदेश के बाद श्रद्धालुओं के लिए यह धार्मिक यात्रा पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार जारी रहेगी। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने स्पष्ट किया कि एक ग्राम पंचायत के पास सदियों से चली आ रही इस पौराणिक और पवित्र यात्रा को रोकने की कोई कानूनी क्षमता या अधिकार नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में इस बात को रेखांकित किया कि किन्नर कैलाश यात्रा का आयोजन राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की उच्चस्तरीय समिति द्वारा तय किए गए कड़े प्रोटोकॉल के तहत किया जाता है। ऐसे में पंचायत के पास न तो इस व्यवस्था में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार है और न ही वह पंजीकृत सहकारी समितियों को भंग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इस प्राचीन यात्रा को किसी पंचायत स्तर के फैसले से नहीं रोका जा सकता।

हाई कोर्ट ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन कराते हुए यात्रा का सुचारू और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने पोवारी पंचायत को कड़ाई से पाबंद किया है कि वह यात्रा के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा, रुकावट या हस्तक्षेप न करे। इस आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को दुरुस्त रखने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
उल्लेखनीय है कि किन्नर कैलाश यात्रा इस वर्ष भी 1 जुलाई से शुरू हो चुकी है और तय समय-सारणी के अनुसार 30 जुलाई तक निरंतर जारी रहेगी। पोवारी पंचायत ने 13 जुलाई 2026 को एक प्रस्ताव पारित करके इस यात्रा पर रोक लगाने की घोषणा की थी। ग्राम सभा की विशेष बैठक में उपस्थित 112 लोगों ने यात्रा को बंद करने का विरोध में मत दिया था, जबकि 62 लोग इसके पक्ष में थे। बहुमत का हवाला देते हुए पंचायत ने यात्रा को हमेशा के लिए रोकने का फैसला सुना दिया था।
पंचायत ने न केवल यात्रा को प्रतिबंधित किया, बल्कि आयोजन से जुड़ी पंजीकृत संस्था ‘श्री प्रकाशंकरा किन्नर कैलाश यात्रा सोसायटी’ को भी अवैध रूप से भंग करने का आदेश दे दिया था। हाई कोर्ट ने पंचायत के इस कदम को पूरी तरह गैर-कानूनी माना है। इस मामले में अदालत ने सभी प्रतिवादियों को अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय की गई है, तब तक प्रशासन की देखरेख में यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।


















