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सीडी मामला: विशेष अदालत से बरी हुए पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप

सीडी मामला: विशेष अदालत से बरी हुए पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप कश्यप

सोलन|
तथाकथित सीडी मामले में आरोपी शिमला लोकसभा के पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप को कोर्ट ने बरी कर दिया है। यह जानकारी वीरेंद्र कश्यप के वकील सुधीर ठाकुर ने मीडिया में दी।
उन्होंने कहा कि वीरेंद्र कश्यप के खिलाफ एक फर्जी सीडी तैयार की गई थी। जिसे मामला दर्ज होने के बाद फोरन्सीक जाँच के लिए भेजा गया था। लेकिन मामले से जुड़े तथ्य पाए न जाने के बाद, रिपोर्ट में यह कहा गया कि यह नहीं माना जा सकता की इससे कोई छेड़छाड़ नही हुई। जाँच में पाया गया कि सीडी में मामले से जुडी कोई निंरतरता नहीं है। और जो साक्ष्य उसमे है वह भी मामले से मेल नहीं खाते। जिससे कोर्ट ने उस सीडी को फर्जी पाया।

मीडिया से बात करते हुए पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप ने कहा कि वर्ष 2009 में मेरे खिलग एक षड्यन्त्र रचा गया था।जिस पर एक मुक़दमा अदालत में चला था। जिसमे बीते कल माननीय अदालत द्वारा उन्हें बरी कर दिया गया है। वीरेंद्र कश्यप ने बताया कि उनके विरोधियों ने उनके चुनाव लड़ने से पहले बदनाम करने के उनके खिलाफ एक साजिश रची थी। लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाएऔर वह चुनाव भी जीतते रहे। उन्होंने बताया कि उनके इस मामले में 39 गवाहों में से 31 के बयान दर्ज हुए। जिस पर क्रॉस इग्जामिन हुई।

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बता दें कि वीरेंद्र कश्यप का स्टिंग ऑपरेशन मामला वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव से पहले सामने आया था। चुनाव के दौरान एक सीडी जारी की गई थी, जिसमें एक होटल के कमरे में पैसों का लेनदेन होने का स्टिंग किया गया था। इस मामले को लेकर काफी हो-हल्ला हुआ था। इसके बावजूद कश्यप लोकसभा चुनाव जीत गए थे। मामले को लेकर विजिलेंस ने भ्रष्ट्राचार निरोधक अधिनियम की धारा-9 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

वीरेंद्र कश्यप के खिलाफ़ एफआईआर विजिलेंस ब्यूरो के शिमला थाने में दर्ज हुई। मामला दर्ज होने के बाद विजिलेंस ने सांसद सहित कई लोगों के बयान दर्ज किए और अदालत में चालान पेश किया। इस मामले में सांसद वीरेंद्र कश्यप को नामजद किया गया है।

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उल्लेखनीय है कि मामले को लेकर 2010 में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है, जिसके आधार पर केस दर्ज किया जा सके। भाजपा सरकार के समय कश्यप को इस मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद मामले की फिर से जांच हुई और कोर्ट में चालान पेश किया गया था। जिस पर काफी समय तक मामला कोर्ट में चला और आखिरकार वह बीते कल ही इस मामले से बरी हो गए

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