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शिमला में आदमखोर तेंदुए पर मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए सुनाया ऐतिहासिक फैसला

शिमला : आदमखोर तेंदुए की पहचान करने और उसे पकड़ें में अब तक नाकाम वन विभाग, वन्यजीव विभाग

शिमला|
शिमला के कनलोग क्षेत्र से 5 साल की बच्ची को तेंदुए द्वारा उठाए जाने के मामले में स्वतः संज्ञान लेने के पश्चात प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश पीएस राणा व सदस्य डॉ. अजय भंडारी की खंडपीठ ने मामले से जुड़े अहम तथ्यों व रिकॉर्ड के दृष्टिगत यह पाया कि उक्त तेंदुआ आदमखोर हो चुका है, इसलिए यह जनसाधारण के जीवन के लिए खतरा बन चुका है।

इसके लिए आयोग ने वन विभाग को जिम्मेदार ठहराया और जनसाधारण को तेंदुए के आतंक से बचाने के लिए आयोग ने कड़े निर्देश जारी किए। आयोग ने वन विभाग को निर्देश दिए कि तेंदुए को तुरंत जिंदा पकड़ लिया जाए और उसे उसके पूरे जीवन तक पिंजरे में रखा जाए।

अगर तेंदुआ पकड़ा नहीं जा सकता है तो उस स्थिति में उसे तुरंत ही मार दिया जाए। इस बाबत वनमंडलीय अधिकारी शिमला शहर व वन्य जीव वार्डन तेंदुए के लिए तुरंत डेथ वारंट जारी करें। आयोग ने तेंदुए द्वारा मारी गई 5 वर्षीय बच्ची के दादी सोहदरा देवी को 4 लाख रुपए क्षतिपूर्ति हर्जाने के तौर पर दिए जाने के आदेश भी जारी किए।

आयोग ने एक माह के भीतर वन्य जीव व रिहायशी क्षेत्रों के संपर्क मार्गो में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने वन्य जीव व आवासीय मानव कॉलोनी क्षेत्र में एक माह के भीतर तारों द्वारा फैंसिंग किए जाने के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने वन्य जीव व रिहायशी क्षेत्र में 1 माह के भीतर सारी झाड़ियां काटने के आदेश जारी किए हैं।

उक्त क्षेत्रों में एक माह के भीतर सुरक्षित बफर जोन स्थापित करने के आदेश जारी किए हैं। शिमला वन क्षेत्र में रहने वाले तेंदुओं की लोकेशन के बाद 1 माह के भीतर टैग लगाने के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने वन विभाग को अपने आदेशों के अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए अनुपालना रिपोर्ट एक माह के भीतर आयोग के समक्ष दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं।

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