Himachal Folk Singer Inder Jeet: हिमाचल प्रदेश के कला और सांस्कृतिक जगत के लिए एक बेहद गौरवपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के सुप्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत का चयन देश के अत्यंत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार’ के लिए किया गया है। यह घोषणा संगीत नाटक अकादमी द्वारा की गई है, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्तशासी संस्था है।
बता दें कि यह राष्ट्रीय पुरस्कार भारतीय कला और संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले होनहार युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है। हिमाचल प्रदेश के लिए यह गौरवपूर्ण खबर है। जैसे ही उनके चयन की यह खबर सार्वजनिक हुई, हिमाचल प्रदेश के संपूर्ण सांस्कृतिक, सामाजिक और कला जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।

संगीत नाटक अकादमी की ओर से जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, लोक गायक इंद्रजीत को यह सम्मान हिमाचली लोकसंगीत, पारंपरिक लोकसंस्कृति और राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके द्वारा दिए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के रहने वाले इंद्रजीत की यह यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। उन्होंने बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के केवल अपनी नैसर्गिक प्रतिभा और कड़े परिश्रम के दम पर लोकगायन के क्षेत्र में एक विशेष मुकाम हासिल किया है। उनके गाए गीतों में हिमाचल की माटी की खुशबू, पारंपरिक लोक परंपराएं, स्थानीय बोलियां, संस्कृति और पहाड़ी जीवन के विविध रंग स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं। देश-विदेश में बसे हिमाचलियों के बीच उनके लोकगीत बेहद चाव से सुने जाते हैं।
इंद्रजीत के कई पारंपरिक और आधुनिक पहाड़ी गीत बेहद लोकप्रिय हुए हैं, जिनमें ‘लाड़ी शाऊंणी’, ‘पाखली माणु’, ‘बुधूआ मामा’, ‘तिरछी नज़रे’ और ‘सोलमा लाड़ी’ जैसे नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन गीतों ने उन्हें आम जनता के बीच एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। लोकसंगीत को समृद्ध करने के साथ-साथ इंद्रजीत ने अपने गीतों को सामाजिक सुधार का माध्यम भी बनाया है। उन्होंने विभिन्न सामाजिक सरोकारों से जुड़े गंभीर विषयों को अपने लोकगीतों के माध्यम से समाज के सामने बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
युवा गायक ने अपने गीतों में पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से शामिल किया है, जिन्हें समाज के हर वर्ग से व्यापक सराहना मिली है।
उदाहरण के तौर पर, उनका अत्यंत चर्चित गीत ‘पाखली माणु’ लुप्तप्राय मोनाल पक्षी के संरक्षण को लेकर जन जागरूकता फैलाने में काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ है। इसके अतिरिक्त, युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने के लिए उनके द्वारा गाए गए गीतों “चिट्टा मुक्त हिमाचल” और “मता करदे नशा” ने युवा पीढ़ी को नशे के खिलाफ जागरूक और प्रेरित करने का काम किया है।
उल्लेखनीय है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार को भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में देश का एक बेहद प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है। लोक गायक इंद्रजीत को यह राष्ट्रीय सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा और वर्षों की कड़ी मेहनत की बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति, लोककला और पारंपरिक लोकसंगीत को भी राष्ट्रीय पटल पर मिली एक बहुत बड़ी पहचान है।
इस विशेष उपलब्धि पर राज्य के कला, सामाजिक और सांस्कृतिक मंचों से जुड़े तमाम प्रबुद्ध लोगों ने इंद्रजीत को बधाई दी है और इसे हिमाचली संगीत के इतिहास में एक गौरवपूर्ण क्षण बताया है।
















