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कोरोना की दूसरी लहर में 1 करोड़ भारतीय हुए बेरोज़गार

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प्रजासत्ता नेशनल डेस्क|
कोरोना वायरस महामारी ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है| ताजा आंकड़े बताते हैं कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के चलते देश में करीब एक करोड़ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है| सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी महेश व्यास ने सोमवार को यह जानकारी दी| व्यास ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा कि थिंक टैंक के आकलन के मुताबिक, बेरोजगारी दर मई में 12 फीसदी होने का अनुमान है, जो अप्रैल में 8 फीसदी थी|

व्यास ने कहा, “अर्थव्यवस्था में कामकाज सुचारू होने के साथ कुछ हद तक समस्या का समाधान हो जाने की उम्मीद है| लेकिन यह पूरी तरह से नहीं होगा|” व्यास के मुताबिक, जिन लोगों की नौकरी गई है, उन्हें नया रोजगार तलाशने में दिक्कत हो रही है, असंगठित क्षेत्र में रोजगार तेजी से पैदा होते हैं, लेकिन संगठित क्षेत्र में अच्छी नौकरियों के आने में समय लगता है|

पिछले साल मई में कोरोना लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी दर 23.5 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक चली गई थी| कई विशेषज्ञों की राय है कि संक्रमण की दूसरी लहर चरम पर पहुंच चुकी है और अब राज्य धीरे-धीरे पाबंदियों में ढील देते हुए आर्थिक गतिविधियों की अनुमति देना शुरू करेंगे|

व्यास ने आगे कहा कि 3-4 फीसदी बेरोजगारी दर को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘सामान्य’ माना जाना चाहिए| यह बताता है कि स्थिति ठीक होने में समय लग सकता है| उन्होंने कहा कि सीएमआई ने अप्रैल में 1.75 लाख परिवारों का देशव्यापी सर्वे का काम पूरा किया. इससे पिछले एक साल के दौरान आय सृजन को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है|

व्यास के मुताबिक, सर्वे में शामिल परिवार में से केवल 3 फीसदी ने आय बढ़ने की बात कही जबकि 55 प्रतिशत ने कहा कि उनकी आमदनी कम हुई है| सर्वे में 42 फीसदी ने कहा कि उनकी आय पिछले साल के बराबर बनी हुई है| उन्होंने कहा, ‘‘अगर महंगाई दर को समायोजित किया जाए, हमारा अनुमान है कि देश में 97 फीसदी परिवारों की आय महामारी के दौरान कम हुई है|’’

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