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Gender Stereotypes Handbook: ‘ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं’, इलाहाबाद HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, यौन हमले के मामलों में जजों की हो ट्रेनिंग

CJI Surya Kant Gender Stereotype Handbook: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने 2023 में जारी 'हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स' को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह हार्वर्ड-ओरिएंटेड है और रेप सर्वाइवर्स या आम लोगों के लिए समझना मुश्किल। NJA से नई गाइडलाइन बनाने को कहा।
Published on: 11 February 2026
Gender Stereotypes Handbook: 'ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं', इलाहाबाद HC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, यौन हमले के मामलों में जजों की हो ट्रेनिंग

CJI Surya Kant Gender Stereotypes Handbook: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने ‘हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स’ को अस्वीकार कर दिया है। यह गाइड 2023 में तत्कालीन CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की पहल पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी की गई थी। इसका उद्देश्य अदालतों में महिलाओं के संदर्भ में इस्तेमाल होने वाली रूढ़िगत और अपमानजनक भाषा को खत्म करना था।

हालांकि, CJI सूर्य कांत का मानना है कि यह हैंडबुक न तो यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं और न ही आम लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। मंगलवार, 10 फरवरी को CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने टिप्पणी की कि इस हैंडबुक में यौन अपराधों के विभिन्न पहलुओं को तकनीकी और फॉरेंसिक भाषा में समझाया गया है, जिसे पीड़ित, उनके परिजन या आम नागरिक आसानी से नहीं समझ सकते।

यह टिप्पणी इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले के संदर्भ में की गई। उस फैसले में जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा था कि “पीड़िता के स्तनों को पकड़ना और उसके पाजामे का नाड़ा तोड़ना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता।” इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे बेहद असंवेदनशील करार दिया था। इसी मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने संबंधित हैंडबुक को खारिज करने की बात कही।

CJI ने कहा कि यह गाइड “बहुत अधिक हार्वर्ड-केंद्रित” है। पीठ ने भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) को निर्देश दिया कि वह विषय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वकीलों की एक समिति गठित करे, जो इस मुद्दे की दोबारा समीक्षा कर नई गाइडलाइन तैयार करे और अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपे। अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में एमिकस क्यूरी शोभा गुप्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का सहित अन्य वकीलों की सहायता ली जाएगी।

CJI ने सुझाव दिया कि संशोधित सामग्री को अंतिम रूप देने के बाद NJA इसे हाई कोर्ट के जजों के लिए अध्ययन सामग्री के रूप में विकसित करे। इसके तहत जजों को बैचों में बुलाकर यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई में आवश्यक संवेदनशीलता के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट से उपदेश देने के बजाय NJA में व्यावहारिक प्रशिक्षण अधिक प्रभावी होगा।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च 2025 के उस निर्णय को भी निरस्त कर दिया, जिसमें अपराध की तैयारी और अपराध के प्रयास के बीच अंतर किया गया था। इस फैसले के बाद व्यापक विवाद हुआ था। 26 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस निर्णय पर रोक लगा दी थी और संबंधित टिप्पणी पर चिंता व्यक्त की थी।

हैंडबुक ऑन कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स’ क्या है?
यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी एक कानूनी मार्गदर्शिका है, जिसे 16 अगस्त 2023 को तत्कालीन CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ ने प्रस्तुत किया था। इसका उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही और निर्णयों में महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण और अपमानजनक शब्दों के उपयोग को समाप्त करना था।

इस हैंडबुक में ऐसे शब्दों की सूची दी गई है जिन्हें लैंगिक रूप से अनुचित माना गया है, और उनके स्थान पर तटस्थ और सम्मानजनक शब्दों के उपयोग की सिफारिश की गई है। उदाहरण के तौर पर—

-‘ईव-टीजिंग’ के स्थान पर ‘स्ट्रीट सेक्सुअल हैरेसमेंट’
-‘हाउसवाइफ’ के बजाय ‘होममेकर’
-‘हुकर’ या ‘प्रॉस्टिट्यूट’ की जगह ‘सेक्स वर्कर’
-‘फूहड़’ या ‘चरित्रहीन’ जैसे शब्दों की जगह सिर्फ ‘महिला’ शब्द का प्रयोग

हैंडबुक की प्रस्तावना में तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने लिखा था कि यह दस्तावेज महिलाओं से जुड़े प्रचलित स्टीरियोटाइप की पहचान करता है, जिनका उपयोग कभी-कभी अदालतों में भी हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि इसका उद्देश्य पुराने फैसलों की आलोचना करना नहीं, बल्कि यह समझाना है कि अनजाने में इस्तेमाल होने वाले पूर्वाग्रह कानून की निष्पक्षता को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, इसमें यौन हिंसा से जुड़े मामलों में लागू कानूनी सिद्धांतों की भी जानकारी दी गई है, जो निर्णय देते समय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

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